लक्ष्मी का अवतार गाय

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** रक्षा करना गाय की,इनसे है संसार। वैतरणी की तारणी,पशुधन प्रण अपार॥ घी मक्खन दधि दूध से,मिले गाय से आज। गाय नहीं कुछ भी नहीं,पूजा कर लो साज॥ माता रूप महान है,लक्ष्मी का अवतार। धन वर्षा करती यही,खुश होते घर-बार॥ इनके गोबर से बने,खेत हेतु बहु खाद। उन्नत फसल … Read more

इज़्ज़त की रोटी

अरुण कुमार पासवान ग्रेटर नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************* रोटी के टुकड़ों से पेट समझौता कर सकता है, पेट की आग नहीं। वो शोलों में तब्दील होने लगती है, इंतज़ार करने लगती है एक आँधी का, कि जिस पर सवार होकर वो राख कर देगी, टुकड़े फेंकने वाली उस दुनिया को जो भूख की आग का मज़ाक उड़ाती … Read more

देशहित में वो लीन हर पल

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* भारत की पहचान हैं मोदी। भारतीयों की शान हैं मोदी। देशहित में वो लीन हर पल, शत्रुओं के शमशान हैं मोदी। नमो-नमो हो रहा है चूंकि, समय का वरदान हैं मोदी। बिना युद्ध के तोपें चल गईं, सेना का अभिमान हैं मोदी। गरीबों का मन मोहा उसने, … Read more

जरूरी है…

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** आम को अब ख़ास होना भी जरूरी है। इसलिए अब आज रोना भी ज़रूरी है। सब मिले खैरात में मुमकिन नहीं शायद, कर मशक्कत बोझ ढोना भी जरूरी है। काटना है फ़सल ग़र इंसानियत की तो, फिर लहू से सींच बोना भी ज़रूरी है। ग़म जहां के भूल सपने देखना … Read more

जाल में फँसा खुद आदमी

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** आदमी क्यों आदमी से दूर है, स्वार्थ के हाथों बहुत मजबूर है। मोह में फँसकर महाभारत रचा, फल मिला तो क्यों गमों में चूर है। प्रकृति का शोषण किया सोचे बिना, घिर प्रदूषण में हुआ बेनूर है। बेटियों को मारता था गर्भ में, गैर की बेटी उसे मंजूर है। जाल … Read more

आइए जलते हैं

डॉ.चंद्रेश कुमार छतलानी  उदयपुर (राजस्थान)  ************************************************************************** आइए जलते हैं, दीपक की तरह। आइए जलते हैं, अगरबत्ती-धूप की तरह। आइए जलते हैं, धूप में तपती धरती की तरह। आइए जलते हैं, सूरज सरीखे तारों की तरह। आइए जलते हैं, अपने ही अग्नाशय की तरह। आइए जलते हैं, रोटियों की तरह और चूल्हे की तरह। आइए जलते … Read more

अँधेरों को निगलते जा रहे

लक्ष्मण दावानी जबलपुर(मध्यप्रदेश) **************************************************************** खुशी के दीप जलते जा रहे हैंl हरिक मंजर बदलते जा रहे हैंl जला कर दीप दीवाली के यारों, अंधेरों को निगलते जा रहे हैंl बिछा के आँखें अब स्वागत में माँ के, दिल-ऐ-अरमां महकते जा रहे हैंl बसा कर प्रेम अंतर मन में अपने, रंगों में माँ के ढलते जा … Read more

माला जगमगा गई

अजय जैन ‘विकल्प’ इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** लो शुभ दीपावली आ गई, मंद-मंद मुस्कानें छा गई। मौसम भी करवट बदलने लगा, दीपों की माला जगमगा गई। भूमि पुत्र का चेहरा खिल गया, मानो मन की मुराद पूरी हो गई। मंगल गीतों-ढोल से आँगन रोशन, हर सू लहर खुशी लहरा गई। माँ लक्ष्मी का आशीष बरसता रहे, प्रेम … Read more

रोशनी बन जगमगाओ

रूपेश कुमार सिवान(बिहार)  ******************************************************** प्यार का दीपक ज़लाओ इस अंधेरे में, रुप का जलवा दिखाओ इस अंधेरे में। दिलों का मिलना दिवाली का ये पैगाम, दूरियाँ दिल की मिटाओ इस अंधेरे में॥ अजनबी है भटक न ज़ाए कहीं मंजिल, रास्ता उसको सुझाओ इस अंधेरे में। ज़िन्दगी का सफर है मुश्किल इसलिए, कोई हमसफर हमदम बनाओ … Read more

एकता दिवस

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* लौह पुरुष जी आपके ईरादे कितने थे नेक, अब क्रिकेट मैच के दिन हिन्दू-मुस्लिम होते हैं एक। धारा-३७० हटने पर मचाया था इतना बवाल, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठते हैं हमारी एकता पर सवाल। लौह पुरुष होते तो कश्मीर में नहीं होती कोई शहादत, नहीं लहराता कोई कश्मीर में झंडा-ए-बगावत। जितना … Read more