बुराई में अच्छाई

आशीष प्रेम ‘शंकर’ मधुबनी(बिहार) ************************************************************************** क्यूँ कहते हो कि ये मुझसे नहीं होगा ? क्यूँ कहते हो कि ये मेरे लिए बना नहीं होगा ? बनी तो दुनिया भी सिकंदर के लिए नहीं थी, पर उसकी मेहनत में कोई शक भी तो नहीं था। वो बैठा न था,किस्मत के भरोसे, वो चलता न था,काफिलों के … Read more

बोलो मत,सुनो!

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* बोलो मत,सुनो, कहो मत,देखो! जैसा हो रहा है,होने दो, नाशपाती को नाशपाती मत कहो, सेब कहोl क्योंकि, राजा ने कहा है मीडिया उसे सेब ही कह रही है, इसलिए,तुम भी कहोl गलती से नाशपाती कह गये, तो मुसीबत झेलना तय हैl अखबारों में तुम्हारे नाम पर, लम्बी-चौड़ी सम्पादकीय निकलेगी टेलीविजन … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आत्मजा खंडकाव्य से अध्याय-१४……………… इसीलिए तो कहती हूँ माँ, मैं भी अपना पति चुन लूँगी लघु जीवन के ताने-बाने, अपने हाथों से बुन लूँगी। मैं तेरी चिन्ता का कारण, नहीं अधिक दिन बनी रहूँगी देकर जन्म पराया कहती, यही परापन न सहूँगी। माता-पिता नहीं जब अपने, तो कोई क्यों होगा अपना … Read more

नारी

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* नारी रत्न अमूल्य धरा पर। ईश्वर रूप सकल सचराचर॥ राम कृष्ण जन्माने वाली। सृष्टि धर्म की सत प्रतिपाली॥ बेटी बहिन मात अरु दारा। हर प्रतिरूप मनुज उद्धारा॥ नारी जग परहित तन धारी। सुख-दु:ख पीड़ा सहे दुधारी॥ द्वय घर की सब जिम्मेदारी। बिटिया वहन करे वह सारी॥ पढ़ी लिखी जब होती नारी। … Read more

शेर की दहाड़ ‘लौह पुरुष’

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** सरदार हम सभी की शान हैं, भारत देश की पहचान हैं। इतिहास के गलियारे खोजते हैं, ऐसे सरदार पटेल दिल में बसते हैं। ‘लौह पुरुष’ की ऐसी छवि थी, ना देखा,ना सोचा कभी था। आवाज शेर की दहाड़ थी, ह्रदय कोमलता की पुकार थी। एकता के सूत्र में जिसने … Read more

विश्वविजय

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** खड़ा हुआ है लौह पुरुष, एकता भाव जगाने को। विखण्डित होते भारत, को अखण्ड बनाने कोll वर्षों से जो रहा उपेक्षित, अब सम्मान दिलाने को। देशप्रेम जीवन समर्पित, वल्लभ कदम मिलाने कोll आसमां को छूता परचम, झंडा तिरंगा लहराने को। सबसे ऊंचा रहता हरदम, विश्व पताका फहराने कोll दौड़ … Read more

साथ निभाते हैं नयन

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** सुन्दर प्रकृति का एहसास कराते हैं नयन, बिना शब्द के बातें करते हैं ये नयनl खुशी,प्रेम,घृणा,क्रोध,भावों की अनुभूति कराते…. हैं ये नयन, इनकी देख-रेख ठीक से करो तो उम्रभर साथ निभाते हैं ये नयनl बाल्यावस्था में मिचमिचाते हैं नयन किशोरावस्था में ख्वाब सजाते हैं नयन, वयस्कों मे कमजोर हो जाते हैं … Read more

राष्ट्रीय एकता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** एक रहे हैं,एक रहेंगे,गर्व लिये हरसाएंगे, भारत की सम्प्रभुता की नित,शौर्य-ध्वजा फहराएंगे। नेहरू,गांधी का था सपना, वल्लभ भाई ने सींचा सीमाओं पर दे क़ुर्बानी, नक्शे को हमने खींचाl सदा अखंडित,नहीं हैं खंडित,हम प्रचंड बन जाएंगे, भारत की सम्प्रभुता की नित,शौर्य-ध्वजा फहराएंगेll नित्य एकता का लेखा है, किंचित नहीं कोई … Read more

नून रोटी रोज़ खाते रह गए

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** नून-रोटी रोज़ खाते रह गये। पर कलम यूँ ही चलाते रह गये। इससे अच्छा हम चलाते फावड़ा, गीत ग़ज़लें ही बनाते रह गये। तालियों से भूख मिटती है नहीं, मुफ़्त में कविता सुनाते रह गये। सो गये बच्चे बिना खाये मगर, काफ़िया हम तो मिलाते रह गये। चिटकुलों का … Read more

माँ तो माँ होती है

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** माँ का आँचल सदा, स्नेह प्यार बरसात है। बड़ी ही खुश नसीब होते, जिन्हें ये प्यार मिलता है। माँ शब्द ही ऐसा है, जिसमें पूरा ब्रह्मण्ड समाता है। तभी तो माँ का कर्ज, कोई उतार नहीं पाता॥ जिसे मिलता है, माँ की सेवा का अवसर। वो संतान खुशनसीब होती, जिसे मिलता … Read more