कभी नहीं जान पाओगे

मोनिका गौड़’मोनिका’ बीकानेर (राजस्थान ) ************************************************** मैंने जो जाना लिखा जो पहचाना लिखा, जो ना जाना,ना पहचाना वो महसूस कर लिखाl जानने,लिखने और पहचानने के बीच फिसलते रहे कुछ अनुभव, जो सिर्फ गालों पर उन्हें सूखे अश्कों में लिखाl और अपने ही हाथों से मिटा मुस्कान में लपेट कर पेश कर दिया, चाय के साथ … Read more

कहते पागल हैं

बिनोद कुमार महतो ‘हंसौड़ा’ दरभंगा(बिहार) ********************************************************************* (रचनाशिल्प:बहर २१२२ २२२२ २२) सत्य बोलूँ तो कहते पागल है, झूठ बोलूँ तो कहते पागल है। बात इतनी ही तो अब सब बोले, जो न बोलूँ तो कहते पागल हैll काम करता हूँ मन से तब कहते, काम के पीछे तो वह पागल है। बैठ घर में यूँ ही … Read more

महँगाई डायन

अनंत ज्ञान गिरिडीह (झारखंड) ********************************************************************** महँगाई डायन बिग बाज़ार में, खरीददारी कर रही है हज़ार मेंl क्या ठाट-बाट से बाज़ार आई है, देखो बड़ा-सा पर्स भी साथ लाई हैl लेकर आई है सूची लंबी-चौड़ी, देखते बन रही है उसकी भागा-दौड़ीl कभी इस तल्ले से उस तल्ले पर, कभी कपड़ों पर,तो कभी श्रृंगार परl जी भर … Read more

बात-बात पे आँख दिखाता है…

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* (रचनाशिल्प:मात्रा भार २४) कल पिलाया दूध उन्हें आँख दिखाता है। उँगली पकड़ चलाया राह तू बताता हैl जिगर का टुकड़ा था कल तक तू माँ-बाप का, वृद्धाश्रम में ले जाकर आज बिठाता है। कल तक माँ-माँ करता फिरता आगे-पीछे, अब उसी को बात-बात पे आँख दिखाता है। पेट काट कर … Read more

तो फिर क्यों आ रहे हो

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो, बताओ,क्या जताने आ रहे हो ? तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन, तो फिर क्यों अब मुझे वापिस मनाने आ रहे होl क्यों पिंजरे में रखा था तुमने अब तक कैद करके, क्यों पिंजरे से मुझे अब तुम छुड़ाने आ रहे होl गिराया … Read more

दिल को चीरता रोदन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** बेहद दर्दनाक ख़ौफ की कालिमा सूरत की सीरत से स्तब्ध,भौंचक्का, चारों तरफ पसरा मासूम निर्दोष चीखती मौत का भष्मासुर अनल तांडव, मचा हाहाकार,दिल को चीरता रोदन कूदते,चिल्लाते,जलते देश के होनहार निर्माणक असहाय चिराग। मर्माहत सूना फिर ममता का आँचल, जला क्रूर असुर के दावानल में त्राहि-त्राहि जीवन रक्षण … Read more

दर्द ज्यादा हो तो बताया कर

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************* दर्द ज्यादा हो तो बताया कर, ऐसे तो दिल में न दबाया करl रोग अगर बढ़ने लगे बेहिसाब, एक मुस्कराहट से घटाया करl तबियत खूब बहल जाया करेगी, खुद को धूप में ले के जाया कर, तरावट जरूरी है साँसों को भी, अंदर तक बारिश में भिगोया करl तकलीफें सब … Read more

चलो सत्य की राह पर

विरेन्द्र कुमार साहू गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ****************************************************** चारित्रिक सौंदर्य का,उदाहरण है राम। श्रेष्ठ कार्य उपमान है,दो अक्षर का नामll जिनसे संभव हानि हो,मत रख उनसे नेह। पिस्सू पशु को त्याग दे,मृत जब उनकी देहll नभ मंडल में चाँदनी,फैली है चहुँओर। लेकिन केवल चाँद पर,मोहित रहे चकोरll बुद्धि सुरक्षा के लिए,करो ईश का ध्यान। तन की रक्षा … Read more

क्या अदा है तेरी

निशा गुप्ता  देहरादून (उत्तराखंड) ************************************************************* (रचना शिल्प:काफिया-आना,रदीफ़-तेरा) याद मुझको आ गया यूँ मुस्कुराना तेरा, नजरें झुकाना झुकाकर फिर उठाना तेरा। क्या अदा है तेरी या मुझको सताना तेरा, मार डालेगा मुझे फिर बातें बनाना तेरा। सर्द आहें मेरी तुझ तक तो पहुंचेगी कभी, बैठ कर फिर अदा से चिलमन उठाना तेरा। महताब ज्यों फलक पे … Read more

हाय रे गरीबी

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** भूख में तरसता यह चोला, कैसे बीतेगा ये जीवन। पहनने के लिए नहीं है वस्त्र, कैसे चलेगा ये जीवन। किसने मुझे जन्म दिया, किसने मुझे पाला है। अनजान हूँ इस दुनिया में, बहुतों ने ठुकराया है। मजबूरी है भीख मांगना, छोटी-सी अभी बच्ची हूँ। सच कहूं बाबू जी, खिला … Read more