क्यूँ मैं छंद के बंधन बाँधूं…
डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** क्यूँ मैं छंद के बंधन बाँधूं, क्यूँ पहनूं बंद अलंकार के कुदरत ने मुझको दे डाले, हसीन प्यार के ख्वाब सुहाने। क्यूँ मैं बाँधूं… बिजली की पैंजनियां दी हैं, स्वर्ग गंगा का गल-हार चाँद मुखडे़ पर दी है, गज़ब चाँदनी की मुस्कान। क्यूँ मैं बाँधूं… फूलों सी खुशबू में भीगा, … Read more