नहीं पूर्वजों की सहेजी निशानी

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** शिला की तरह टूटते जा रहे हैं, कि रिश्ते सभी छूटते जा रहे हैंl न दादा के रिश्ते न दादी के रिश्ते, सभी ढो रहे सिर्फ शादी के रिश्तेl जड़ों में ही विष कूटते जा रहे हैं, कि रिश्ते सभी छूटते जा रहे हैं…ll नहीं पूर्वजों की सहेजी निशानी, … Read more

ढल रहा हूँ…

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ***************************************************************************  न मंजिल न रास्ते जाने किस और चल रहा हूँ। ख्वाब अधूरे ही ख्वाब से आज निकल रहा हूँ। आशायें,विश्वास हैं कैसे जीवन जी रहा, उस भगवान की आस्था के बल पर पल रहा हूँ। दिल भी मेरा तड़प रहा सफर अब कहाँ पर है, उस मोम की तरह मैं मन … Read more

माँ दरश दिखा जाना…

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* नवरात में आकर के माँ दरश दिखा जाना। नवरात चले जाये,माँ तुम न कभी जानाll पलकों से तेरी मैंया मैं डगर बुहारुँगी, गंगाजल से अंबे मैं चरण पखारूँगी। माँ नव नव रुपों में तुम झलक दिखा जाना, नवरात में आकर के माँ दरश दिखा जाना…ll मैंने द्वार सजाई है माँ … Read more

ये पागल कौन मुआ है

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* जो भी जी चाहे वो मिल जाये,ऐसा भी कहीं हुआ है हवा भी हवा हो जाती है,जिसने तो सबको छुआ हैl राख हो जाती है हर चीज,गर छू लेती है आग उनको इस दौड़ में सम्हाल खुद को,इधर खाई उधर कुंआ है। चालाक मौसीयों को,घंटी बांधने की ना कर कोशिश, … Read more

बेटियाँ

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** एक मजदूर की बेटी, जब स्कूल जाने की इच्छा जताती है उस रात पिता को नींद नहीं आती है, पहुंचाते हुए बेटी को स्कूल दिखाई पड़तीं हैं उबड़-खाबड़ रास्तों से, रफ्तार से गुज़रती बैने,मोटरसाइकिलें कि हिल जाता है पिता अपनी जगह से, और एक अमीर की बेटी बगैर … Read more

रे कपूत!अब भी संभल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** गाली दे दे एक को,तुम बना दिये स्टार। जनता अब बुद्धू नहीं,जीते चौकीदारll गाली दे थकते नहीं,बहुसंख्यक को आज। लोकतंत्र है शर्मसार,बन वोट बैंक समाजll जमानती हैं एक मंच,निज कुनबों के साथ। सोच न बदली सल्तनत,मिले चोर के हाथll कहते हो हम हैं वतन,मिले साथ हो पाक। आतंक … Read more

प्रीत की पुकार से

प्रभात कुमार दुबे(प्रबुद्ध कश्यप) देवघर(झारखण्ड) *********************************************** प्रीत की पुकार सेl रीत की गुहार सेl हो नहीं अधीर-सा। ठोक ताल बीर-सा। है धरा पुकारती। है तुझे गुहारती। सत्य पे डटे रहो। क्षेम पे गहे रहो। कृष्ण-सा कहो वही। पार्थ-सा लड़ो कहीं। सोभती भुजंग वो। रोक पाश जंग जो। धीर-सा रहो कहीं। चीर-सा फटो नहीं। रीत प्रेमजीत … Read more

चुनाव

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** सत्यता की शपथ वह खाने लगे हैं, जबसे चुनाव करीब आने लगे हैं। फिर वादों का अंबार होगा, फिर माइक पे एलान होगा फिर एक दूजे पे लांछन लगाने लगे हैं। जबसे चुनाव करीब… सत्ता इन पर अजब है नशा, राजनीति के अखाड़े में बुरी है दशा। वह कुर्सी के चक्कर … Read more

मतदान जागरूकता

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* जागरूक होकर करो,मतदाता मतदान। राजधर्म निर्वाह को, करिये ये शुभदानll सब कामों को छोड़कर,करना है यह काम। एक दिवस मतदान का,बाकी दिन आरामll सही करो मतदान तो,हो उत्तम सरकार। मन का प्रत्याशी चुनो,मत दे कर हर बारll डरो नहीं,झिझको नहीं,रहे प्रशासन संग। अच्छा प्रत्याशी चुनो,लोकतंत्र के अंगll अब आलस को त्यागिए,चलो … Read more

हर विधा में परिपूर्ण है ‘काव्यांजलि’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** पुस्तक समीक्षा……………….. वर्तमान अंकुर प्रकाशन के अंतर्गत साझा काव्य संग्रह की श्रृंखला में ‘काव्यांजलि’ हर प्रकार की विधाओं से परिपूर्ण एक खूबसूरत संग्रह है। इस संग्रह का संपादन निर्मेश त्यागी ने किया है। १२ कवियों की रचनाओं से परिपूर्ण यह काव्य संग्रह पाठकों को आकर्षित करता है। हरियाणा के देशपाल … Read more