जन्नत में बहता लहू

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** पहलगाम हमला… ख़बर आई है-धरती के स्वर्ग में,शबनम की जगह बारूद बरस रहा हैगुलमोहर की टहनियों पर खून टपक रहा है,पहाड़ियों की गोद में सोएअट्ठाईस सपनेसिर्फ़ इसलिए तोड़ दिए गए,कि उन्होंने ‘काफ़िर’ होना चुना था। आम आदमी-जिसकी पूरी दुनियाबीबी, बच्चे और रोटी की महक से महफूज़ होती है,उसे नहीं पता-‘काफ़िर’ … Read more

पहला-पहला प्यार…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ रावी अपने दोनों हाथों में शॉपिंग बैग्स पकड़ी हुई खुशी से चहकती हुई पति अर्जुन के साथ बात करती हुई मॉल से निकल रही थी तभी उसकी ऩजर एक स्मार्ट से युवक पर पड़ी। उसको पहचानते ही वह ठिठक गई थी… लेकिन यह क्या… वह तो उन लोगों की तरफ ही आ … Read more

हृदय-वेदना

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** झिलमिल-झिलमिल अंतरिक्ष मेंचमक रहे तारक-गण रे,चाँद-चाँदनी चंचल किरणेंजागृत करती तन-मन रे। एक चित्र आँखों में मेरीचुपचाप उतर कर आता रे,जैसे नभ के वक्षस्थल परचाँद कोई शरमाता रे। सब कुछ खोकर भी अपना प्रियसाथी नहीं बचा पाई रे,जाने कैसे चुपके-चुपकेवेदना हृदय में उतर आई रे। उस असीम के तार जुड़े हैंकरता चिंतन अंतर्मन … Read more

कुछ भी हो, जीवित रहो

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* बूढ़ा होना, बीमार होना,और मरना एक ही बात हैजो कुछ भी हो, जीवित रहो,अगर तुम्हें जीना हैतो मृत्यु से पहले मत मरना,खुद को मत खो देनाउम्मीद को मत खो देना,दिशा को मत खो देना। किसी को नीची नज़र से ना देखना,भेदभाव न करनाखुद से, अपने समाज से,एक व्यक्ति या कई व्यक्तियों … Read more

तुझ-सा न कोई हमसफ़र मेरा

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… ज़िंदगी के हर एक मोड़ पर,साथ निभाया है जिसने मेराऐ किताब! तुझ-सा ना कोई,इस जहां में हमसफ़र मेरा। कोख में जब था मैं माँ की,सुनता था तेरी सारी बातेंसकुशल मैं धरती पर आऊँ,पढ़ती थी माँ कई किताबें। माँ सुलाती जब-जब मुझको,लोरियाँ तेरे पन्नों की है … Read more

देश की नींव ‘परिवार’

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** परिवार समूचे राष्ट्र की है सबसे महत्वपूर्ण कड़ी,देश की किस्मत और अस्मत है परिवार से जुड़ीपरिवार वो ईंट है जिस पर राष्ट्र की सदा नींव खड़ी,परिवारों की ईंट-ईंट ईट मिलकर ही इमारत देश की बड़ी। परिवार केवल कुछ लोगों जमावड़ा मात्र नहीं है,यह संस्कार, चारित्र्य, पुरुषार्थ गढ़ने का मंदिर हैव्यक्ति निर्माण … Read more

कायर न समझ लेना

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* पहलगाम हमला… अश्रुओं को सह सको तो,हाल-ए-जख्म समझ लेनाग़म से दिल अब फटा जा रहा,अग्निपरीक्षा मत लेनाजल्लाद नहीं, इंसान हैं हम,कायर न समझ लेना। दिल में दर्द की आँच जले तो,सत्य नहीं झुठला देनायही सत्य और एक ही सत्य है,सर्प को दूध नहीं देनाबाँह वस्त्र की आज ही काटो,आस्तीन में पलने … Read more

पुस्तक है उजियार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… वाहक पुस्तक सत्य की, पुस्तक है उजियार।पुस्तक ने इस लोक से, किया परे अँधियार॥ पुस्तक देती चेतना, नया सोच दे नित्य।पुस्तक को मानें सभी, जैसे हो आदित्य॥ पुस्तक अनुशासन रचे, संस्कार की धूप।जो पुस्तक को पूजता, पाता तेजस रूप॥ पुस्तक गढ़े चरित्र को, पुस्तक … Read more

पुस्तक हमारी सच्ची दोस्त

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… पुस्तकों का यह ज्ञान,हमें प्रकाश की और ले जाता हैयह अन्धकारमय जीवन को रोशनी का संसार है,और यह हम सभी के करीब है क्योंकि पुस्तक ही हमारी सच्ची दोस्त है। रामायण, महाभारत, गीता व धार्मिक ग्रंथ,यह मीरा, तुलसीदास, कबीर के छंदहर एक गीत-दोहों … Read more

पृथ्वी की रक्षा कर्तव्य

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* ‘विश्व पृथ्वी दिवस (२२ अप्रैल)’ विशेष… कहती पृथ्वीपर्यावरण दिनमानव जागे। उचित होगासंरक्षण करनाप्रत्येक दिन। दूषित करेनदियाँ जलाशयसोचता नहीं। उजाडे़ वनवृक्ष काटते सदाप्रगति नाम। बाढ़ बढा़एतूफा़न भी भीषणपाए हताशा। वर्षा गले जो,बदले तापमानमानव त्राहि। करे दुहाईसोचे नहीं मानवआए विपदा। रोको जी क्षतिअपनी जीव दुर्गतिकरो प्रगति। वृक्ष लगाओहरियाली बढा़ओहानि हो कम। प्रकृति … Read more