दिनकर की व्यथा

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* तुम्हीं बताओ तुमको दिनकर,चाहूं, निकट बुलाऊं मैंतेजोमय इतने हो तुम,कैसे पास बिठाऊं मैं ? बहुत परोपकारी हो भास्कर,किससे सीखा तुमने दान!धरती के देव हो तुम तो,जग करता है तुम्हें प्रणाम।हम मानव हैं ऋणी आपके,कैसे खुश कर पाऊं मैं ? जग को उजियारा देते हो,कभी नहीं भी थकते तुमतुम बिन जीवन अंधकारमय,जीव-जगत रहते … Read more

मुझको अपना नहीं समझा

गुरुदीन वर्मा ‘आज़ाद’बारां (राजस्थान)******************************** मैं बन नहीं सकी शोभा घर की, मुझको अपना नहीं समझा गया।मैं सज नहीं सकी दुल्हन की तरह,कोई अरमां मुझे नहीं समझा गया॥मैं बन नहीं सकी शोभा… माथे की बनकर मैं बिन्दी,मैं शान रही मस्तक की सदा,अब लगा लिया दिल सौतन से,सम्मान मेरा नहीं समझा गया।मैं बन नहीं सकी शोभा…॥ अब … Read more

धर्म और राजनीति में समन्वय आवश्यक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** ‘राजनीति’ एक ऐसा क्षेत्र है,जो‌ समाज को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सर्वाधिक प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में यदि राजनीति की दिशा और दशा सही नहीं होगी,तो समाज को भारी क्षति पहुँचेगी। इस कारण धर्मतंत्र को चाहिए कि वह राजनीति पर नजर रखे तथा उसके भटकाव को रोके,उसका मार्गदर्शन करे,जन-जागरण करे,आम-जन-मानस … Read more

पर्यावरण और बरसात

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** पर्यावरण बचाइये,धरिये मन यह बात।पेड़ लगाएं भूमि पर,आज करेऺ शुरुआत॥धरती हरियाली सजी,वृक्ष सजे नव पात।फूलों से महके खिले,सजे हुए हरषात॥ धरती अंबर खिल उठे,महक उठे बरसात।शुद्ध हवा पानी लिए,जग पाए सौगात॥स्वच्छ हवा में घूम कर,जल्दी उठकर प्रात।स्वस्थ रहें ताजे रहें,पाए निंद्रा रात॥ पायेऺ घर परिवार संग,बरसाती सौगात।सरवर सारे खिल उठें,ये सुंदर-सुंदर … Read more

अंकीय चुनाव:अच्छाई पर सहमति बने

ललित गर्गदिल्ली ************************************** आखिरकार चुनाव आयोग ने ५ राज्यों-उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,गोवा,पंजाब व मणिपुर के विधानसभा चुनावों की तारीख कोरोना की तीसरी लहर के बढ़ते संक्रमण के बावजूद घोषित कर साहस का परिचय दिया। आयोग ने इससे मुकाबला करने के उपायों को लागू करने की घोषणा भी की है और चुनावों को अधिकाधिक पारदर्शी,लोकतांत्रिक व आदर्श … Read more

वर्ष का प्रथम पर्व

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* जीवन के रंग (मकर संक्रांति विशेष)…. सूर्य का उत्तरायण में और होता मकरराशि में प्रवेश,खिचड़ी,मक्का,तिल,गुड़ और मूंगफली का इसमें समावेश।पतंगबाजी के पेंचों का बहुत,महत्व मकर संक्रांति में-बसंत आगमन ऋतु परिवर्तन का,समाहित इसमें गणवेश॥ विभिन्न स्थानों प्रदेशों में पर्व के,भिन्न-भिन्न हैं नाम,लोहड़ी बिहू पोंगल उत्तरायण,नामकरण हैं तमाम।खिचड़ी सहभोज व दान का है,विशेष महत्व … Read more

जनता की भाषा से कन्नी काटते हिंदी-भाषी राज्य

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** महाराष्ट्र सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय… हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि महाराष्ट्र में तमाम दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम अनिवार्यत: मराठी भाषा में देवनागरी लिपि में ही होंगे। पहले भी इस प्रकार का आदेश था,लेकिन अब इसे पूरी गंभीरता से लागू करने का निर्णय … Read more

न गुज़रे किसी पर

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** छलकती हैं आँखें ज़रा ‘सी खुशी पर।जो गुज़री है हम पर न गुज़रे किसी पर। परेशाँ हमें देखकर हँसने वालों।हँसी आ रही है ‘तुम्हारी ‘हँसी पर। मुसीबत उठाई है इतनी जहाँ में।तरस’ आ रहा है ‘हमें ज़िन्दगी पर। मुक़ाम अपना ख़ुल्देबरीं में था लेकिन।निकाले गए हम ज़रा-सी ‘कमी पर। बग़ल में … Read more

कलम बने हथियार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* आग उगलती लेखनी,ही लाती परिणाम।जो बदले युग को सदा,लाये नव आयाम॥ लेखन में जब सत्य हो,परिवर्तन का भाव।वही लेखनी पूज्य है,जिसमें जनहित-ताव॥ गाये जो बस दर्द,ग़म,पीड़ाओं के गीत।बने झोंपड़ी,भूख की,जो सच्ची मनमीत॥ वही लेखनी धन्य है,जो असत्य से दूर।जो रखती संवेदना,वही कलम मशहूर॥ कलम बिके ना,दृढ़ रहे,हों कैसे हालात।तभी बनेगी … Read more

जीवन

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* कविता में जीवित रहना,छंद अलंकार से रिस-रिसकरसांझ ढले निश्चित है सूर्यास्त होना,सत्य जीवन का प्रलाप यही है। दु:ख अवसाद पीड़ा बनी कविता,शाश्वत जगत की झंकार है कवितासमाहित है सुखानुभूति पूर्णिमा-सी,मेघ से बूंद बन टपकती है कविता। न्यौछावर है शब्द-शब्द में,गढ़ी हुई चादरों पर सविता।अश्रु विलाप आंनद सागर में,सुगंध बनी जीवंत कविता॥