मोह क्यों ?
वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** मोह शरीर से,मिट्टी सेईंट पत्थरों से,वस्तुओं सेअपनों से,अपने आस-पास सेयही मोह अपने जीवन से,मोह पाश में बांध लेताकभी न मिटने वाली मृगतृष्णा में,मानव उलझकर रह जाता। सब-कुछ नश्वर,समय परिवर्तनशीलकल आज-कल में निहित,हम सबकी कथा व्यथाफिर किसका मोह,क्यों कर मोह! स्व में ही सर्वस्व,जो जान ले इस बात कोफिर न हो मोह,न … Read more