मोह क्यों ?

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** मोह शरीर से,मिट्टी सेईंट पत्थरों से,वस्तुओं सेअपनों से,अपने आस-पास सेयही मोह अपने जीवन से,मोह पाश में बांध लेताकभी न मिटने वाली मृगतृष्णा में,मानव उलझकर रह जाता। सब-कुछ नश्वर,समय परिवर्तनशीलकल आज-कल में निहित,हम सबकी कथा व्यथाफिर किसका मोह,क्यों कर मोह! स्व में ही सर्वस्व,जो जान ले इस बात कोफिर न हो मोह,न … Read more

कुत्ता कभी नहीं पालूँगी…

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* मेरी गली में रात को कुत्ते बहुत ज़ोर-ज़ोर से भौंक रहे थे। मैंने कारण जानने की उत्सुकता से पति को गहरी नींद से जगाते हुए पूछा, “इतनी रात को ये कुत्ते क्यों भौंक रहे हैं ?“उन्हेोंने कहा, ‘तुम कुत्तों से बहुत डरती हो! सो जाओ,मुझे भी सोने दो,सुबह जल्दी काम पर … Read more

माँ का क़र्ज चुकाना है

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** ये जग जननी हमारी है,हमें सारे जहां से प्यारी है,ये सारे जहां को दिखाना है,हमें माँ का कर्ज़ चुकाना है। माँ की ख़ातिर मर जाएंगे,न समझो हम डर जाएंगे,जां देकर फ़र्ज़ निभाना है,हमें माँ का कर्ज़ चुकाना है। आज़ादी के हैं दीवाने हम,जल जाएंगे हैं परवाने हमतन-मन-धन सब लुटाना है,हमें माँ का … Read more

सूखी है जमीं

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** रचना शिल्प:काफिया-आत(बात,सौगात,खैरात इत्यादि),रदीफ-हुई होगी २ २ १ १ २ २ २ २ २ १ १ २ २ २ जब दूर गगन,धरती,आपस में मिले होंगे,तब कितनी सुहानी-सी,कुछ बात हुई होगी। नजदीक से दिखते तो,कुछ बात खुली होती,धरती पे तभी सुख की सौगात हुई होगी। सब मेल दिलों के भी तबसे … Read more

आन-मान-शान थे सुभाष जी

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** ‘नेताजी’ अवतरण दिवस विशेष…. जनम-मरण,सब देश के लिए ही रहा,भारती की आन-मान-शान थे सुभाष जी।तीव्र बुद्धि,दिव्य भाव,शौर्य के प्रतीक रहे,मातृ भूमि के स्वाभिमान थे सुभाष जी॥ देश में विदेश में भी करनी और कथनी से,राष्ट्र भक्ति के प्रतिमान थे सुभाष जी।दोस्त और दुश्मन करते सदा हैं याद,वास्तव में इतने महान थे सुभाष … Read more

जिंदा रखो सपने

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** कभी सपनों में दिखते हो,कभी दिल में आ जाते होतुम्हारी यही अदाएं तो,हमें बहुत ही भाती हैंतुम्हारे दिल की धड़कनें,तुम्हें क्यों तड़पाती हैंऔर अपने वालों को तुम,क्यों मिलने बुलाते हो। कोई है काम का मारा,कोई है नाम का मारामेरी सोंच इन दोनों से,बहुत ही अलग हैमैं करता हूँ जो भी,बिना किसी स्वार्थ … Read more

कलयुग का कपड़ा…बर्तन!!

डॉ. सोमनाथ मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* जब से हमारे देश में मॉल संस्कृति आई है,तब से देख रहा हूँ कि घर में कपड़ों का ढेरी लगा रहता है। हर तरफ कपड़े ही कपड़े दिखाई पड़ते हैं,यहाँ तक कि कुर्सी और मेज़ पर भी कपड़े रखे रहते हैं। कितनी बार घर वालों को समझाया कि भाई कपड़ों को … Read more

पंजाब:केजरीवाल ने पैर क्यों खींचे ?

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)********************************** सांसद भगवंत मान को पंजाब में आम आदमी पार्टी का मुख्यमन्त्री का चेहरा घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रश्न पूछा जा रहा है कि पार्टी के सर्वेसर्वा दिल्ली के मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल ने इस राज्य में अपने पैर पीछे क्यों खींच लिए ? पिछले ३-४ महीनों से पंजाब की दीवारें … Read more

पुनः स्वस्थ भारत बनाना

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ****************************************** अजब समय गजब दौर,सोते कर्फ्यू जागते शोरशिक्षा बंद चुनावी होड़,महंगाई नाचती हर मोड़। ईमान गिरा बेईमान खड़ा,आमजन का रोजगार गिरादारू का बाजार दौड़ पड़ा,राजा देखता खड़ा ही खड़ा। ‘कोरोना’ के इस कहर पर,संकट के काले प्रहर परभले लोग भी मिलते हैं,प्यार बाँटते वह चलते हैं। कोरोना के इस तीसरे दौर … Read more

नृत्य मधुरम प्राण सरगम

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** जीवन है सरगम,ताल नृत्य मधुरम,जन्म नाद ब्रम्ह ॐ से,पावन पुनीत है। नृत्य से न झूम पाए,न गीत सुन मुस्काए,वह न हृदय कर्ण,रंध्र ही प्रतीत है। शंकर के डमरू से,भवानी के घुँघरू से,शारदे की वीणा से स्वर चली रीत है। गोकुल या गोपुर में राधे-रानी नूपुर में,श्याम बंशी सुर प्रगट वसुंधरा जीत है। … Read more