कलम की अभिव्यक्ति
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** जो कुछ भी मैं कहना चाहूँ ये कलम मेरी कह जाती है,चल पड़ती दिल के काग़ज़ पर मन भावों को दर्शाती है। दिल में खुशियाँ हैं ग़म भी हैं ख़ामोश जुबाँ रहती मेरी,जब होता नहीं सहन मुझसे लग जाती है दु:ख की ढेरी।मैं नहीं चाहता कहूँ मगर आँखें ही राह बनाती … Read more