कलम की अभिव्यक्ति

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** जो कुछ भी मैं कहना चाहूँ ये कलम मेरी कह जाती है,चल पड़ती दिल के काग़ज़ पर मन भावों को दर्शाती है। दिल में खुशियाँ हैं ग़म भी हैं ख़ामोश जुबाँ रहती मेरी,जब होता नहीं सहन मुझसे लग जाती है दु:ख की ढेरी।मैं नहीं चाहता कहूँ मगर आँखें ही राह बनाती … Read more

समाज और राष्ट्र की जरूरत के अनुसार रचना कर्म करें- डाॅ. दवे

स्मृति समारोह….. इंदौर(मप्र)। रचनाकार समाज और राष्ट्र की जरूरत के अनुसार रचना कर्म करें। आजादी के महानायकों और क्रांतिकारियों के अनछुए पहलुओं पर भी लेखन करें।यह बात इंदौर प्रेस क्लब के सभागृह में समारोह में मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने कही। अवसर रहा वरिष्ठ शिक्षक और लेखक डाॅ. एस.एन. … Read more

स्त्री स्वयं सिद्धा,बनाती रही है अपने रास्ते-सुमित्रा महाजन

अखिल भारतीय महिला साहित्य समागम इंदौर (मप्र)। स्त्री स्वयं सिद्धा है और मर्यादा के मार्ग से अपने रास्ते बनाती रही है। स्त्री से अधिक सामंजस्य की परिभाषा कौन जानता है,वह सामंजस्य सहजता से साधती है। यह सामंजस्य ही समाज में संतुलन ला सकता है।वामा साहित्य मंच और घमासान डॉट काम के तत्वावधान में अखिल भारतीय … Read more

‘सेबी’ छोटे निवेशकों के हितों को क्षति पहुँचाने के लिए अंग्रेजी का सहारा ले रहा ?

संदर्भ- शि. सं. DCOYA/E/२०२१/०५६३७ को अंग्रेजी में उत्तर लिखकर बिना समाधान बंद किया जाना। विषय-‘सेबी’ छोटे निवेशकों के हितों को क्षति पहुँचाने के लिए अंग्रेजी भाषा का सहारा ले रहा है और आम निवेशकों की हिंदी में की गई शिकायतों पर कार्यवाही नहीं करता है। आदरणीय महानुभाव,मैं भारत का एक आम छोटा निवेशक हूँ,मेरे जैसे … Read more

ज़िन्दगी

डॉ.अशोकपटना(बिहार)*********************************** कौन हूँ क्या हूँ और यहां क्यों हूँ,है यह ज़िन्दगी की एक परिभाषाअपने-आपको यह पहचानने की,देती है खुशियाँ बनकरजीवन की अभिलाषा। अपने-आपको पहचानने का,सुन्दर अनमोल हुनर हैसामाजिकता का देता भाव,दिखता अपूर्व सुन्दर है। स्वयं को पहचानने का है,एक अनूठा अमृत रूपजनमानस पर एतबार का है,विशिष्ट अद्भुत प्रारूप। ज़िन्दगी ईश्वर का दिया ,सुन्दर नजराना हैप्रगति … Read more

सेवाश्रम में किया कवि सम्मेलन

इंदौर (मप्र)। कविता व गीतों के सभी रंग संस्था नई क़लम के विशेष साहित्यिक आयोजन में झलके, जब संस्था ने दशरथ सेवाश्रम (वृध्दाश्रम) में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। नगर के अनेक कवियों ने अपनी मौलिक रचनाओं से इस विशेष आयोजन को पूर्णता दी। आयोजन में दशरथ सेवाश्रम व गोल्ड कॉईन सेवा ट्रस्ट के सदस्य … Read more

मोल नहीं खुशबू का होता

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** खिल-खिल कर जीने वाला ही,पुष्प समान हल्का होताभार नहीं होता फूलों का,मोल नहीं खुशबू का होता। तौल-तौल कर साँसें लेते,धक नाप धड़कता है जो दिलफूँक-फूँक कर कदम बढ़ाते,क्या बन पाएंगे वो काबिलखुल कर हँसता रहता जो,सागर खुशी लगाते गोता।मोल नहीं खुशबू का होता… माहौल महकने लगता है,जब रिश्तों का बाग लगातेचुन-चुन कर … Read more

दीवारों को मत सुनाओ

दिनेश कुमार प्रजापत ‘तूफानी’दौसा(राजस्थान)***************************************** सुना है,दीवारों के कान हैं,अगर कान है तो सुनती भी होगीसुनती है तो बोलती भी होगी,जब दीवारें बोलती हैं घर कीतो बाहर तक आवाजें जाती है। कान लगा कर देखो दीवार पर,कम्पन सुनाई देता हैसुनो ध्यान से कंठों से निकला,रुदन सुनाई देता है। जिन घरों की बोलती हैं दीवारें,उन घरों में … Read more

धरती माँ…

एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** आकाश जब रोता हैतब बादल बरसते हैं,धरती का रोना कभीकोई नहीं समझते हैं। भूगर्भ कोख में लावासदा प्रवाहित होता है,पर्यावरण असुंतलनही कदाचित होता है। भू-स्खलन व हिमपातप्रकृति की आपदा है,संसाधन कीमत परमानव की विपदा है। मैदानी भू-भाग में हीप्रचंड गर्मी बरसती है,बर्फीले पहाड़ों पर हीसर्द हवा मचलती है। शायद माँ जैसी होतीये सदियों … Read more

खिलखिलाती सुबह

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* आज सोचा था-खिलखिलाती सुबह में,कुछ हटकर करेंगेकुछ काम,उत्साह,उमंग व उल्लास के संग। बीवी हर बात में नुक्स निकालती है,औरबच्चे रहते हैं हमसे अब बे-चिंत। खग का एक डाल से उड़,दूरी डाल पर जा चुप जानाबहुमंजिला इमारतों में,अपने सुख-दु:ख के घोंसले बना लेनाकोई नई बात नहीं! आम बात है!प्रकृति के रंगों में … Read more