दौर ही है
मयंक वर्मा ‘निमिशाम्’ गाजियाबाद(उत्तर प्रदेश) *************************************** क्यों परेशान हो,ये गहरे बादल छँटने दो,शिकन हटाओ,माथे का पसीना हटने दोक्यों जलना तंज़ और तानों की तपिश में,इनकी अगन को ज़रा घटने दो। ये दौर है ज़िंदगी का,जैसा भी मगर दौर ही है,इसके बाद जीने का मज़ा कुछ और ही है…॥ दिल के उफानों को थमने दो,खयालों के सैलाबों … Read more