दौर ही है

मयंक वर्मा ‘निमिशाम्’ गाजियाबाद(उत्तर प्रदेश) *************************************** क्यों परेशान हो,ये गहरे बादल छँटने दो,शिकन हटाओ,माथे का पसीना हटने दोक्यों जलना तंज़ और तानों की तपिश में,इनकी अगन को ज़रा घटने दो। ये दौर है ज़िंदगी का,जैसा भी मगर दौर ही है,इसके बाद जीने का मज़ा कुछ और ही है…॥ दिल के उफानों को थमने दो,खयालों के सैलाबों … Read more

नए वर्ष में हम ‘स्व’ से तनिक बाहर आएं

विचार गोष्ठी… मंडला( मप्र)। आज जाते हुए वर्ष की विदाई और आगत नव वर्ष के स्वागत के अवसर पर यह संवाद आयोजित करने हेतु कथाकार सिद्धेश्वर जी धन्यवाद के पात्र हैं,जिन्होंने कोरोना काल से आज तक युवा प्रतिभाओं को सतत सृजनशील रखा हुआ है। हम सम्बन्धों में नई ऊष्मा का संचार करें और अपनी आत्मीयता … Read more

उनको शिक़ायत हमसे

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’बीकानेर (राजस्थान) ************************************ बे’सबब करने लगे लोग अदावत हमसे,कल तक सीखी,जिसने शराफत हमसे। कोई खास नही दरख्व़ास्त उनसे हमारी,वो आज मगर क्यूं करते बगावत हमसे। कदम चार हैसियत से कम जरुर थे हम,दो कदम आगे हुऐ तो,हुए आहत हमसे। ये कैसी हो गई जलन जमाने को दोस्तों,आज लगी होने उनको शिक़ायत हमसे। शबो-रोज जीते … Read more

बिखरे-बिखरे केश

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************* बिखरी-सी है जिंदगी,बिखरे-बिखरे केश।देखो तो इनको जरा,सुन्दरतम् है वेश॥सुन्दरतम् है वेश,नाज नखरे हैं करती।जब भी देखूँ रूप,हाय वो आहें भरती॥कहे ‘विनायक राज’,चंद्र-सी वो है निखरी।केश घटा घनघोर,व्योम में देखो बिखरी॥

जिंदगी की मोह माया

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)*************************************** रूप की सोलह कला में चाँद कब से ढल रहा है।और ऊपर आग का गोला युगों से जल रहा है। आदमी को भोगनी है सृष्टि की स्वाधीन गतियां,राह के प्रतिकूल वो क्यों धूल माथे मल रहा है। मौत से हारी अभी तक जिंदगी की मोह माया,रोज लालच में हमारा लक्ष्य हर … Read more

परिवार

मदन गोपाल शाक्य ‘प्रकाश’फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)************************************** मेल मोहब्बत राखिए,सुखी रहे परिवार।सबको सुख पहुंचाइए,बांटो सबको प्यार। शीतल मन को राखिके,करो नेक व्यवहार।जभी भरोसा तोड़ते,बढ़ता दु:ख विस्तार। सब अपने-अपने बने,नहीं किसी से द्वेष।सबका मन हो शान्तिमय,परिवारिक उद्देश। एक लक्ष्य सबका बने,एक बने प्रसार।मेल जोल जिसमें रहे,वही सुलभ परिवार। सबकी इज्जत राखिए,मिले प्रेम भरपूर।आँखों में हो प्रेम रस,ये … Read more

वो अटल बिहारी थे

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** अटलबिहारी वाजपेयी विशेष…. नीति पे रहे अडिग अटल,वो अटल बिहारी थे,बालब्रह्मचारी जीवनभर,बने रहे संसारी थे। व्यर्थ नहीं कहते-बकते,सदपथ पर विचरते थे,समाज हितार्थ देश हितार्थ,सदा चिंतन करते थे। परमाणु परीक्षण दूसरा,अकस्मात ही कर दिया,दूसरी बार निज देश का,सीना गर्व से भर दिया। अच्छी योजनाएं चलाई,देश का विकास किया,उस सरल व्यक्तित्व का,दुनिया ने … Read more

काम आई…अच्छाई

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** बहुत कुछ खोकर भी, बहुत कुछ पाया हैजिंदगी के हसीन पल, और कुछ सपने खोए हैंपरंतु जीवन की सबसे, बड़ी चीज प्राप्त हुई हैजिसे साधारण भाषा में, लोग इंसानियत कहते हैं।  चलो अच्छा हुआ कि, काल ऐसा भी आयाजहाँ लोग,लोगों को, निकट से जान जो पाएअमीरी और गरीबी की, खाई को भर जो पायाऔर लोगों ने लोगों को, इंसानियत का … Read more

स्थायित्व

डॉ.किशोर जॉनइंदौर(मध्यप्रदेश)***************************************** ये ज़मीन ना आसमान,ये चाँद ना सितारेये हवा ना पानी,ना घटा ना बरसातकुछ भी स्थायी नहीं। ये चाँदी और सोना,ये इमारतें और गाड़ियाँये धन दौलत ना इज्जत,ये नाम ना शोहरतकुछ भी स्थायी नहीं। ये शरीर ना सुंदरता,ये साँसें ना शरीरये ताक़त ना घमंड,ना सोच ना विचारकुछ भी स्थायी नहीं। ये ज्ञान ना अज्ञान,ये … Read more

नई शिक्षा नीति:नए पंख,नया आसमान

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* भारतवर्ष का पौराणिक इतिहास इतना गौरवपूर्ण रहा है कि इसके जिस क्षेत्र की चर्चा की जाए,वही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट व्यवस्था मानी जाती रही है । जो इतिहास का सत्य भी है। भारतवर्ष में प्रचलित शिक्षा व्यवस्था १९७८ तक भारत वर्ष में शिक्षा का बहुत ही सीमित दायरा था- सिविल, मैकेनिक,इलेक्ट्रिकल,मैकेनिकल और … Read more