सर्द हवाएँ
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* सर्द हवाएँ चल रहीं,फैला है आतंक।जाड़े ने ढाया कहर,मार रहा है डंक॥ कुहरे ने सब कुछ ढँका,सूझे भी नहिं हाथ।स्वेटर,कंबल दे रहे,बस मानव का साथ॥ जनजीवन सब सुस्त है,सड़कें हैं सुनसान।सर्द हवाएँ श्राप हैं,मौसम है हैवान॥ बर्फीली चलती हवा,मार रही है तीर।कौन सुनेगा आदमी,को होती जो पीर॥ चाय,गर्म का दौर … Read more