मेरा विद्यार्थी जीवन और रचना धर्मिता

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. पिताजी यद्यपि अपने समय के कक्षा ४ उत्तीर्ण थे,फिर भी उनकी गणित बहुत अच्छा था।विद्यालय घर से दूर होने के कारण मेरी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। कक्षा ३ से प्राथमिक विद्यालय हऊली (चौनलिया) में प्रवेश लिया। गुरुजी श्री भैरवदत्त एवं श्री दयाकृष्ण जोशी … Read more

मेरी भगवान

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. आज नीरा अपनी बालकनी में बैठी-बैठी अपने विद्यालय के दिन याद कर रही थी,क्योंकि आज उसकी बहुत पुरानी सहेली प्रीति का फोन आया जो उसे अपने बचपन में ले गया। यह उन दिनों की बात है,जब मासूमियत से भरे बचपन के दिन,गाँव की कच्ची सड़कें … Read more

दिखलाते हैं ज्ञान की राह

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* गुरु पूर्णिमा विशेष………. आओ मित्रों सभी मिल के,करें श्री गुरु की बन्दना,देते रहिए आशीष गुरुदेव करती हूँ पूजा-अर्चना। आज बहुत पावन पुण्य दिन है गुरुदेव हमारे पधारे हैं,धरा के सब मानवजन को ज्ञान-विज्ञान दे के संवारे हैं। कोटि नमन,शत-शत नमन,परम पूज्य गुरुदेव हमारे,मुक्ति का मार्ग बताकर के अन्तिम क्षण में बने … Read more

बरसात में…

आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* कारे कारे मतवारे,जालंधर आए आज आकाश में,झूम-झूम मन मयूरा नाचे,रिमझिम-सी बरसात में। खेत खार बाग सब जागे,वारिधर की हुंकार में,बिजुरी चमके चम-चम नभ में,दिन-सा होता रात में। कारी-कारी बदरी आई,ठंडी पुरवाई लाई साथ में,दादुर,मोर,पपीहा,झींगुर को खुशियां मिली सौगात में। नदी-नाले नव जीवन पाए,जीव-जंतु भी थे आस में,बुझी प्यास … Read more

रात जगती रही

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* श्वांसें लरज़ती रहीं,दिल सिसकता रहा। रात ढलती रही,दर्द पिघलता रहा। बदली हँसती रही,चाँद सिमटता रहा। चाँदनी साक्षी रही,आसमां ख़ामोश रहा। दामिनी चमकती रही,बादल गरजता रहा। रात जगती रही,अंधेरा गहराता रहा। घटाएं छायीं रहीं,तूफ़ान शांत हो गया॥ परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी … Read more

गुरु-वंदना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************** गुरु पूर्णिमा विशेष………. गुरुवर तुम तो ज्ञान हो,हो सूरज का रूप।शिष्यों को तुम दे रहे,सदा सुनहरी धूप॥ गुरुवर तुमने सीख दे,बाँटा बहुत विवेक।तुम तो गुरुवर तेज हो,तुम हो हरदम नेक॥ गुरुवर मैं अज्ञानमय,खोया था अँधियार।तुमने ही निज ज्ञान से,जीवन दिया सँवार॥ सत्य,न्याय जाना नहीं,ना नैतिकता-भाव।पर अब गुरुवर है नहीं,मुझको कोय … Read more

भूख सदा दुश्मन निर्भय की

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)******************************************** भूख सदा दुश्मन निर्भय की,आग जगाये यही हृदय की। इसकी पड़ी जहां पर छाया,उसका रोम-रोम झुलसाया।कल तक अपनी जो प्यारी थी,फूलों की दिखती क्यारी थी।चिता बनी है आज समय की॥भूख सदा दुश्मन निर्भय की… भूख नदी तट से टकराई,लहरों ने भी माटी खाई।इसके कारण हुई लड़ाई,नाप सके क्या हम गहराई।कारक बनती … Read more

कुमकुम

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************ कुमकुम रोली साथ में,सुन्दर चमके भाल।नारी की श्रृंगार से,बदले सबकी चाल॥बदले सबकी चाल,देखते मन को भाती।कुमकुम लाली माथ,नाज नखरा छलकाती॥कहे विनायक राज,सजाना नारी को तुम।स्वर्ग परी सी मान,लगे जब माथे कुमकुम॥

शिक्षक ही पथ प्रदर्शक

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* गुरु पूर्णिमा विशेष………. शिक्षक हमें पढ़ाता और शिक्षक ही संवारता है,शिक्षक ही तो उचित ज्ञान हम पर वारता है।हमें देता है वह एक सही दिशा और सम्मति-जीवन नव निर्माण लिये शिक्षक ही सुधारता है॥ माता-पिता और गुरु हमारे जीवन के निर्माता हैं,जान लीजिये-यही तीनों ही हमारे भाग्य विधाता हैं।माँ तो होती है … Read more

गुरु से होती गोविंद की पहचान

दिपाली अरुण गुंडमुंबई(महाराष्ट्र)***************************** गुरु पूर्णिमा विशेष….. माता-पिता ही प्रथम गुरु,जिनसे होती शिक्षा शुरू। कभी डाँट-फटकार सुनाते,जैसे मूर्तिकार मूर्तियाँ बनाते। मार्ग दिखाए वह प्रकाश स्तंभ-सा,मानो कठिनाइयों में अडिग चट्टान-सा। गुरु और गोविंद में भी गुरु को मान,क्योंकि,गुरु से होती गोविंद की पहचान। गुरु मिले तो सब जग प्यारा,गुरु बिन तू,सारे जग से हारा॥