जीवनसाथी

पुष्पा अवस्थी ‘स्वाति’  मुंम्बई(महाराष्ट्र) *********************************************** संध्या जो आए मन घबराए, जीवनसाथी तुम बिन हाय। लागे न तुम बिन सांझ सुहानी, झुकती घटाएं रुत मस्तानी। मन की जलन को और बढ़ाए, जीवनसाथी तुम बिन हाय॥ बीत गए जाने कितने पल, आँखों से बरसे बनके जल। फिर भी प्यास बुझा ना पाए, जीवनसाथी तुम बिन हाय॥ रात … Read more

लो चाँद निकल आया

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’  इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** हर सिम्त मुसर्रत है रौनक़ है फ़िज़ाओं में, लो चाँद निकल आया यादों की घटाओं में। दीदार करूँ तेरा,तू सामने अब आजा, बीता है माहे रमज़ा,हर वक़्त दुआओं में। आ ईद मना लें अब,मिल जाएं गले जानम, दस्तूर निभाएं हम ये इश्क़ के गाँव में। मैं सजदा करूँ … Read more

भारत देश महान है

प्रियांशु तिवारी ‘वात्सल्य’ लखनऊ( उत्तरप्रदेश) **************************************************************************** लोकतंत्र की परिभाषा का अच्छा-खासा नाम है, जनतंत्र की हर भाषा का भारत में सम्मान है दुनिया कहती है ऐसा भारत देश महान है…। सारी दुनिया मान चुकी संस्कृति की यह खान है, जन्म लिए जहाँ नटखट कृष्णा,पूजनीय जहाँ राम है… शील,स्नेह,सत्य,प्रेम का प्रसारित जहाँ से ज्ञान है, दुनिया … Read more

आशिक जमाना कह रहा है….

पारस गुप्ता  ‘शायर दिल से’  चन्दौसी(उत्तर प्रदेश) ********************************************************* दिल्लगी के,दौर में अब,कौन नफरत,कर रहा है… इश्क़ पढ़कर,इश्क़ लिखकर,इश्क़ में जी,मर रहा है… लुट रहा वो,मिट रहा इक,बेवफा के,प्यार में क्यूँ… आजकल पागल को आशिक ये ज़माना कह रहा है…। परिचय-पारस वार्ष्णेय का साहित्यिक उपनाम-पारस गुप्ता ‘शायर दिल से’ है। १९९४ में ६ दिसम्बर को चन्दौसी … Read more

मत थका जिंदगी

राम भगत किन्नौर ******************************************************************* मत थका जिंदगी इतना, मत तड़पा जिंदगी इतनाl हर मंजिल मिली,हर ख्वाहिश मिली, अपने भी मिले,पराये भी मिलेl कोई ना अपना यहां बन पाया, सबने स्वार्थ के लिए रिश्ता है यहां बनायाl दोस्त का प्यार मिला, इकरार,तकरार सब मिलाl सबने रिश्ता तो जोड़ा, स्वार्थ का रिश्ता जोड़ाl थक गया हूँ भगत … Read more

कविता क्या है

देवेन्द्र कुमार राय भोजपुर (बिहार)  ************************************************************* नैतिकता की भटकी राह को सच्चा मार्ग दिखाती कविता, दर्द अश्क की गर्मी को हरपल शीतलता देती है कविताl इंसानों के आत्मज्ञान का दर्पण सही दिखाती कविता, क्यों न कहूँ कि कविता देखो जीवन की प्रतिछाया कविता। वर्तमान के व्यवहारों की परिभाषा होती है कविता, कहे राय हर युग … Read more

हिंसा का हो खातमा

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** घायल हुआ है मानव,खतरे में पड़ी मानवता, नफरत का बीज बो कर मन में है उपजाया मोह से सींचा उसने,आंतक बन उग आयाl कागज के चन्द टुकड़ों में बिक गई मानवता, लाचार हुई है अहिंसा,हिंसक बन कर खायाll मासूमयित रो पड़ी,कंगन ने शोर मचाया, लाली कहे पुकार,सूनी ना करो मेरी मांग … Read more

आजाद पंछी था मैं,मगर..

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** खूबसूरत बला क्यों मेरी हो गईl फूल से फूलकर फुलझड़ी हो गईl एक आजाद पंछी था मैं भी मगर- हाथ क्या दे दिया,हथकड़ी हो गईl परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में भी कुशीनगर … Read more

…ताकि उसके बच्चों के सपने रंगीन हों

रितिका सेंगर  इंदौर (मध्यप्रदेश) ****************************************************** मिट के खुश होना पंख बहुत मजबूत थे उसके… उड़ान भरना जानती थी वो फिर भी, खुद को कर लिया कैद पिंजरे में… ताकि,उसके बच्चों को मिल सके आशियाना…l शब्द बहुत थे पास उसके, बोलना आता था उसको पर रही खामोश… ताकि,उसके बच्चों को रिश्ते मिल सकेंl हौंसला बुलंद था, … Read more

सास-बहू का रिश्ता

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ सास,बहू का रिश्ता क्या होता है, मैं तुमको समझाता हूँ। हर घर की कहानी,तुमको मैं सुनाता हूँ, सुनकर कुछ सोचना,और कुछ समझना। सही बात यदि मैंने कही,तो बता देना मुझे॥ सास-बहू का रिश्ता बड़ा अजीब होता है, बहू,सास को माँ कहे तो रिश्ता प्यारा होता है। सास अगर बहू को बेटी … Read more