अमृत सुधा

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  ********************************************************************************* समुद्र मंथन प्रसंग…………. तपता सूरज आग लगाये चन्द्र सुधा बरसाये, बहुत जरूरी है दोनों ही मानव जीवन पाये। मथा जलधि को देव दानवों ने घट विष का पाया, कैसे सृष्टि बचेगी इससे समझ यही नहीं आया। देवों की विनती सुन भोले जहर पी गये सारा, इस सृष्टि को घोर … Read more

मृत्यु भोज ऐसा कराना बेटा…

विजयलक्ष्मी जांगिड़ ‘विजया’  जयपुर(राजस्थान) ***************************************************************** हाँ बेटा, मेरी मृत्यु पर तुम भी एक मृत्यु भोज कराना। सड़क पर कचरे से, भूख मिटाती गइया है न, उसे भरपेट हरा चारा खिलाना, फिर जीभर शीतल जल पिलाना, और देखो! सड़क पर जो आवारा से घूमते श्वान दिखे, तो उन्हें भरपेट भोजन करानाl हाँ,एक काम जरूर करना, सबसे … Read more

गाँवों को शहर खा गया

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  ********************************************************************************* उजड़ रहे हैं गाँव बिचारे शहर खा गया गाँवों को, ऐसा लगता अपने हाथों काट रहा खुद पाँवों को। और बहुत की चाहत में खेती करना छोड़ दिया, बहुत कमायेंगे शहरों में, कहकर गाँव छोड़ दिया। मेहनत से रिश्ता तोड़ा, शहरों से नाता जोड़ा है, खून-पसीने से जो मिलता … Read more

लड़ते रहे शान्ति की लड़ाई

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- देदी हमें आजादी वो गुजरात का था लाल, लाठी-लंगोटी वाले ने ये कर दिया कमाल। खायी थी कितनी लाठियाँ और जेल भी गये, अरमान दिल के फिर भी मिटने नहीं दिये। किया असहयोग आंदोलन,नमक बना दिया, अंग्रेजों भारत छोड़ दो ये नारा सही दिया। हर काम में अंग्रेजों के … Read more

भोर

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- उगते हुए आदित्य की लाली को है मेरा नमन, छिपते हुए सूरज ने नभ को लाल लाल कर दिया। किरणें आयी भानु की जादू-सा हरसू हो गया, इस धरा को रोशनी से मालामाल कर दिया। खिल गये उपवन सभी औ खिल उठा सारा चमन, फूलों औ कलियों ने गुलशन … Read more

चाँदनी हँसती रही

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- फूल पर मँडराया भँवरा,डालियाँ हिलती रही, खिलखिलाती कलियों के सँग चाँदनी हँसती रही। हँस लो जितना हँसना है,कल बीन कर ले जाएँगे, कलियाँ मुरझा-सी गयी और चाँदनी हँसती रही। सेज पर मधु यामिनी की दी बिछा इक शख्स ने, सिसकती कलियाँ रही और चाँदनी हँसती रही। देखता था मैं … Read more

जीवन-मृत्यु

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- जीवन-मृत्यु खेल निराला विधि का सारा देखा भाला, राज मृत्यु का जाना किसने ! मनुज हो रहा है मतवाला। विधना जो जीवन देता है अच्छे कर्मों से मिलता है, मृत्यु सत्य है जीवन मिथ्या ये सबसे पहले लिखता है। तन है इक माटी का ढेला दो दिन आया दो … Read more

अमृत से भी मीठी बोली

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. मुझे नहीं है सभी विश्व की भाषाओं का ग्यान, मैं करता हूँ अपनी हिंदी भाषा पर अभिमान। हिन्दी वेदों की वाणी है हिन्दी भारत की पहचान, भारत का जन-जन करता है हिन्दी का सम्मान। भारत भाल का मुकुट है ये हिन्दी ही मातृ समान, उर्दू,इंग्लिश … Read more

रक्षाबंधन

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- स्नेह भरा आँखों में मन में चली प्यार की आँधी, हर्षित मन से बहना ने भाई को राखी बांधीl माथे पर कुंकुम का टीका राखी भरी कलाई, बहना दे आशीष और ये वचन दे रहा भाईl बहना तेरी राखी का मैं मोल चुका ना पाऊँगा, पर तेरी रक्षा करने … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* ‘आत्मजा’ खंडकाव्य अध्याय -११ हुई प्रभाती सफल,सुना ज्यों, अंशु खुशी से लगा उछलने ऐसी जीवन संगिनि पाये, मन भीतर से लगा मचलने। भरने लगा उड़ानें ऊँची, ज्यों उसने हो जीती बाजी लगा उसे ज्यों हुई प्रभाती, उसके सँग विवाह को राजी। करने लगा प्रतीक्षा ऐसी, किस पल पहल करे वह आकर … Read more