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टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा

जसवीर सिंह ‘हलधर’
देहरादून( उत्तराखंड)
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सीमा पर पकड़ बनाने को,भारत को अकड़ दिखाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को।

खिंच गया माथ संशय लेखा,टूटी अतिक्रमण की रेखा,
अपनी सीमा की रक्षा में,लद्दाखी दिखे प्रतीक्षा में।
भारत की संसद दिखी विकल,सेना भारत की गई संभल,
ड्रैगन तन कर के खड़ा हुआ,दादा बन कर के अड़ा हुआ।
भारत की सेना पहुँच गई,ड्रैगन को सबक सिखाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

लकिन वो जिद कर बैठा था,उल्टा भारत पर ऐंठा था,
सेनाएं सम्मुख आई थी,आपस में हाथा-पाई थी।
लड़ने को वो तैयार खड़ी,रण चंडी पैर पसार खड़ी,
डोभाल बीजिंग को धाये,जिंगपिंग को समझा के आए।
बोले शांति का दूत मान,आया विध्वंस बचाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

अपना पूरा रुख जता दिया,सीधे शब्दों में बता दिया,
भारत ना बासठ वाला है,अब तेरे लिये उठाला है।
भारत की टीस बढ़ाएगा,टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा,
यदि मर्यादा तू तोड़ेगा,अपनी ही किस्मत फोड़ेगा।
मैं बुद्ध भूमि से आया हूँ,तेरा मन शुद्ध कराने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

भारत ना रुकने वाला है,सम्मुख ना झुकने वाला है,
ना बुद्ध क्षेत्र ले पाएगा,अक्साई भी दे जाएगा।
ना चल असाध्य को साधन तू,ना चल भारत को बांधन तू,
हम बुद्ध भाव सौदाई हैं,तू बुद्ध धर्म अनुयायी है।
मैं बात बनाने ना आया,आया औकात दिखाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

हमने दुनिया को बुद्ध दिए,महाभारत जैसे युद्ध दिए,
तू रख अपनी धरती तमाम,हम नहीं चाहते एक ग्राम।
यदि बात समझ में ना आई तो रोएंगी चीनी माई,
बोटी-बोटी कट जाएंगे,हम इंच नहीं हट पाएंगे।
बच्चा-बच्चा तैयार खड़ा,भारत माँ पर मिट जाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

जल सेना ताकत जानी नहीं,थल सेना आफत जानी नहीं,
जाटों का हमला देखा नहीं,सिक्खों का अमला देखा नहीं!
गढ़वाली देखे ना लड़ते,रण चंडी खप्पर ले चढ़ते,
तू मर्द मराठे देख जरा,यदुवंशी पटठे देख जरा।
गुरखों का टोला आता है,चंडी पर भेंट चढ़ाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

तूने भारत को जाना ना,तू सही-सही पहचाना ना,
राणा के वंशज देख खड़े,अकबर के अंशज देख खड़े!
घट-घट में राम की वर्षा है,हर परशुराम कर फरसा है,
वो धरा लाल हो जाएगी,कल का सवाल हो जाएगी।
पूरी दुनिया हमें कोसेगी,चीनी की जाति मिटाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

ये इतना भीषण रण होगा,दोनों के लिए क्षरण होगा,
धरती-अम्बर सब डोलेंगे,शिव नेत्र तीसरा खोलेंगे।
जब मान सरोवर में शंकर,फूटेंगे हो कंकर-कंकर,
धरती पानी-पानी होगी,तेरी ज्यादा हानि होगी।
भारत की ताकत का तुझको,आया अंदाज कराने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

हुंकार तू सुन ले रघुपति की,फुँकार तू सुन ले नगपति की,
जापान लड़ेगा भारत संग,दक्षिण कोरिया भी करे जंग।
तेरी गति वापस मोड़न को,बाईडेन खड़ा मुँह तोड़न को,
न चिन्न तेरा बच पाएगा,तू छिन्न-भिन्न हो जाएगा।
वंशज हूँ विश्व गुरु का मैं,आया हूँ पाठ पढ़ाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥

गलवान नदी संघर्ष देख,भरत माता उत्कर्ष देख,
कुछ हासिल ना कर पाएगा,व्यापार ठप्प हो जाएगा!
दोनों की जनसंख्या भारी,दोनों की बड़ी ज़िम्मेदारी,
ये धरा हरी सिंह नलवा की,कविता है ‘हलधर’ जसुवा की।
सब देश ताक में बैठे हैं,हम दोनों के भिड़ जाने को,
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर,आया क्यों हमें डराने को…॥