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झुकने न दिया सिर

प्रीति शर्मा `असीम`
नालागढ़(हिमाचल प्रदेश)
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चंद्रशेखर आजाद शहीद दिवस स्पर्धा विशेष………..

अपना नाम…
आजाद,
पिता का नाम…
स्वतंत्रता बतलाता था।

जेल को,
अपना घर कहता था
भारत माँ की,
जय-जयकार लगाता था।

भाबरा की,
माटी को अमर कर
उस दिन भारत का,
सीना गर्व से फूला था।

चंद्रशेखर आज़ाद के साथ,
वंदे मातरम्…
भारत माँ की जय…
देश का बच्चा-बच्चा बोला था।

जलियांवाले बाग की कहानी,
फिर ना दोहराई जाएगी
फिरंगी को,
देने को गोली…आज़ाद ने
कसम देश की खाई थी।

भारत माँ का,
जयकारा…उस समय
जो कोई भी लगाता था,
फिरंगी से वो…तब
बेंत की सजा पाता था।

कहकर…आजाद,
खुद को भारत माँ का सपूत
भारत माँ की,
जय-जयकार बुलाता था।

कौड़ों से छलनी सपूत वो,
आजादी का सपना
नहीं भुलाता था।

अंतिम समय में,
झुकने ना दिया सिर
बड़ी शान से,
मूँछों को ताव लगाता था।
हँस कर मौत को गले लगाया था,
आज़ाद….
आज़ादी के गीत ही गाता था॥

परिचय-प्रीति शर्मा का साहित्यिक उपनाम `असीम` हैl ३० सितम्बर १९७६ को हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में अवतरित हुई प्रीति शर्मा का वर्तमान तथा स्थाई निवास नालागढ़(जिला सोलन,हिमाचल प्रदेश) हैl आपको हिन्दी,पंजाबी सहित अंग्रेजी भाषा का ज्ञान हैl पूर्ण शिक्षा-बी.ए.(कला),एम.ए.(अर्थशास्त्र,हिन्दी) एवं बी.एड. भी किया है। कार्यक्षेत्र में गृहिणी `असीम` सामाजिक कार्यों में भी सहयोग करती हैंl इनकी लेखन विधा-कविता,कहानी,निबंध तथा लेख है।सयुंक्त संग्रह-`आखर कुंज` सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंl आपको लेखनी के लिए प्रंशसा-पत्र मिले हैंl सोशल मीडिया में भी सक्रिय प्रीति शर्मा की लेखनी का उद्देश्य-प्रेरणार्थ हैl आपकी नजर में पसंदीदा हिन्दी लेखक-मैथिलीशरण गुप्त,जयशंकर प्रसाद,निराला,महादेवी वर्मा और पंत जी हैंl समस्त विश्व को प्रेरणापुंज माननेवाली `असीम` के देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“यह हमारी आत्मा की आवाज़ है। यह प्रेम है,श्रद्धा का भाव है कि हम हिंदी हैं। अपनी भाषा का सम्मान ही स्वयं का सम्मान है।”

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