मेघा बरसे

डॉ.मंजूलता मौर्या 
मुंबई(महाराष्ट्र)
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मेघा बरसे,

तृप्त करो जीवन

तपन मिटेl

सूरज उगा,

जगमगाता जग

आलस्य भागाl

नदी बहती,

गति रुके न कभी

बढ़ते जाओl

नैना बरसे,

जल बिन तरसे

आ जाओ घनl

चिड़िया जागी,

दूर भगाओ निंद्रा

अब तो जागोl

संघर्ष करो,

संकट दूर भागे

मिले मंजिलl

धरा पुकारे,

हो दूर प्रदूषण

सुखी जीवनl

उक्षिप्त मन,

दूर करो निराशा

दिखे प्रकाशl

मेघा बरसे,

तृप्त हुई धरती

मन प्रसन्नll

परिचय-डॉ.मंजूलता मौर्या का निवास नवी मुंबई स्थित वाशी में है। साहित्यिक उपनाम-मंजू है। इनकी जन्म तारीख-१५ जुलाई १९७८ एवं जन्मस्थान उत्तरप्रदेश है। महाराष्ट्र राज्य के शहर वाशी की डॉ.मौर्या की शिक्षा एम.ए.,बी.एड.(मुंबई)तथा पी.एच-डी.(छायावादोत्तर काव्य में नारी चित्रण)है। निजी महाविद्यालय में आपका कार्य क्षेत्र बतौर शिक्षक है। आपकी  लेखन विधा-कविता है। विशेष उपलब्धि शिक्षकों के लिए एक प्रकाशन की ओर से आयोजित निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कृत होना है। मंजू जी के लेखन का उद्देश्य-चंचल मन में उठने वाले विविध विचारों को लोगों तक पहुँचाकर हिंदी भाषा की सेवा करना है। 

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