मेरी प्यारी माँ

रुकमणि भोई
महासमुंद(छत्तीसगढ़)
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मातृ दिवस विशेष ………………………………..


मेरी एक मुस्कान के लिए,
हर गम सह लेती है।
लड़खड़ा जाऊँ तो,
हाथ थाम लेती है।

कभी हार जाऊँ तो
हौंसला बढ़ा देती हैं,
मेरी एक मुस्कान के लिए माँ,
हर गम सह लेती हैं।

जन्नत से भी प्यारी,
माँ आपकी गोद है।
हँसकर सह लेती,
गमों का बोझ है।

उलझनें चाहे कितनी हों,
मुश्किलें चाहे जितने हों।
मुझपे कभी आँच न,
आने देती हैं।

मेरी एक मुस्कान के लिए माँ,
हर गम सह लेती हैं।
मेरी गलतियों को,
भूल समझकर
माफ कर देतीं हैं।

मेरी छोटी-सी चोट पे,
आपकी आँख भर आती है।
मेरी एक मुस्कान के लिए माँ,
हर गम सह लेती हैं।

आपकी ही दी हुई,
ये जिंदगी है माँ।
मेरी ये दुनिया,
आपके चरणों में
समर्पित है माँ।

आपके होने से ही
मुझमें जान आई है।
आपके द्वारा ही मैंने,
ये दुनिया पाई है।

दूध का कर्ज तो
कभी न चुका पाऊँगी माँ।
मगर आपकी बेटी होने का,
फर्ज अदा कर जाऊँगी माँ॥

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