महिमा बरसात की

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** अब तो हो जाने दो बरसात, तपन से धरा हो गई है त्रास। बुझ रही थी नहीं सभी की प्यास, बरसात होने से पूरी हुई आस। पानी के लिए मचा था हाहाकार, बरसात होने से आया करार। ह्रदय में धरती के पड़ रही थी दरार, बरसात के आने से आ … Read more

शहर

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** लगी हुई है शहर में,जैसे कोई आग। ले प्रातः से रात तक,रहा आदमी भाग॥ ढूँढ रहा है शहर में,आकर क्यों तू प्यार। सम्बन्धों का है यहाँ,पैसा ही आधार॥ शहर बात उससे करे,हो जिससे कुछ काम। बिना स्वार्थ सम्बन्ध का,यहाँ नहीं है नाम॥ शहरों के ऊँचे भवन,पत्थर दिल के लोग। है … Read more

जी चाहता है

पुष्पा अवस्थी ‘स्वाति’  मुंम्बई(महाराष्ट्र) *********************************************** जी चाहता है मेरा,भारत नव निर्मित हो, शहरों से गांवों तक-जन जन का हित हो। जी चाहता है…॥ हर घर में रोजी-रोटी हो,जन जन बनें सशक्त, अपराध मुक्त समाज हो,सब हों देशभक्त। जात-पांत और भेद-भाव से,हृदय रहित हो, जी चाहता है…॥ जय भारत गूंजे देश-देश में,आगे प्रवृत्त हों, विश्वगुरु होने … Read more

बंजारे-सी रातें

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* वक़्त के दामन से कुछ लम्हें चुरा कर, मैंने आज सोचा चलो इन लम्हों में ढूँढते हैं अपने खोये हुए दिन, गुज़री हुई रातें। वो बचपन की शरारतें वो जवानी की हसीं बातें, ज़िन्दगी की उलझनों में न जाने कहाँ खो गए…। कितनी जल्दी, फ़िसल जाता है रेत-सा वक़्त… वक़्त … Read more

मानवीय संबंधों की कहानी है `सेवा`

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** हिंदी साहित्य में उपन्यास का एक महत्वपूर्ण स्थान है। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि उपन्यास का जन्म बंगाल की धरती पर हुआ था और श्रीनिवास दास द्वारा लिखित परीक्षा गुरु हिंदी साहित्य का प्रथम उपन्यास माना जाता है। प्रेमचंद को आधुनिक उपन्यास का जनक कहा जाता है। रेनुका … Read more

जीवन का लेखा-जोखा

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ हनन और दमन तुम दूसरों का कर रहे हो, उसकी आग में अपने भी जल रहे हैं। कब तक तुम दूसरों को रुलाओगे, एक दिन इस आग में खुद भी जल जाओगे। कभी अपने किए पर बहुत पछताओगे, पर उस समय कुछ नहीं कर पाओगेl कहते हैं उसके घर में देर … Read more

माँ…एक रोटी

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** एक रोटी मुझे तू दे दे माँ, मेरे पेट की भूख मिटा दे… कितने दिनों से भूखी हूँ, फिर भी कभी न रोती हूँ। अब सहा नहीं जाता है माता, कैसे तुम्हें बताऊँ ? चन्द घण्टों की बात नहीं, कब तक तुमसे छुपाऊं। बेटी थोड़ा कर ले इंतजार, रोटी वाले भैया … Read more

मुमकिन

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** वक्त के साथ ही चलते रहना। कदम-कदम कर बढ़ते रहना। लक्ष्य अगर पाना है मुमकिन- तो जज्बा से बढ़ते रहनाll हिम्मत रख कर बढ़ने वाले। चट्टानों पर चढ़ने वाले। कभी न पथ से हटते हैं वह- मुमकिन राह बनाने वालेll श्रम से पीछे हटो कभी ना। कर्म विमुख तुम कभी … Read more

फुहार

छगन लाल गर्ग “विज्ञ” आबू रोड (राजस्थान) **************************************************************************** पुलक उठी है उर मनुहार, मुखर मुग्ध कर रही फुहारl सिहर उठा कोमल अति गात, चंचल मुग्ध बेसुध सखि रातl श्याम देह निखरी अनुपात, भरे मकरंद रस जलजातl रजत श्याम का मृदु श्रृंगार, मुखर मुग्ध कर रही फुहारl मधुर मिलन बढ़ जाता राग, धरा गगन मिल बना … Read more

पैसा बोलता है

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** जग में सबसे है बड़ा,देखो पैसा आज। इसके बिन होता नहीं,बड़े-बड़े से काजll पैसा है तो मान है,पैसा से ही यार। पैसा से परिवार है,पैसा से संसारll बिन पैसा भोजन नहीं,भूखे हैं बेहाल। सज्जन माँगे भीख हैं,होते मालामालll पैसा से यह जान है,पैसा से ईमान। पैसा ही भगवान … Read more