चाँद निकल आया है

देवेन्द्र कुमार राय भोजपुर (बिहार)  ************************************************************* देखो चाँद निकल आया है, मुंडेर से अपलक झांके सितारों का हार लिए, जूगनू की बिन्दी पहने बादलों का घूँघट किए, रजनी दुल्हन का श्रृंगार निरख-निरख के अन्तः से तारों का मन ललचाया है, देखो चाँद निकल आया है। ओस की बारात सजी है, मन्थर हवा का गीत पत्तियों … Read more

भारतीय संस्कृति और भाषाओं के वैश्विक प्रचारक प्रो.रत्नाकर नराले

डॉ.राकेश कुमार दुबे टोरंटो(कनाडा) ************************************************************** टैग-साहित्य सेवा को समर्पित …….. भारत से बाहर भारतीय मूल के लोगों एवं अभारतीय लोगों में भारतीय संस्कृति और भारतीय भाषाओं के प्रचार में भारतीय मूल के कनाडा निवासी प्रो.रत्नाकर नराले का नाम आज सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। लगभग ५० वर्षों से कनाडा में रहते हुए प्रो.नराले हजारों … Read more

सच का वृक्ष

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** सच का वृक्ष, सूखने लगा आज- संभल जाओl अपनों बीच, कितने धोखेबाज- ध्यान लगाओl जरूरत है, झूठ का पूर्णनाश- आगे तो आओl सच का बीज, रख अपने हाथ- उगाते जाओl

शुभ जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ

हिन्दीभाषा.कॉम मंच के रचनाकार साथी पवन गौतम ‘बमूलिया’जी का ३ जुलाई को शुभ जन्मदिन है..इस पटल के माध्यम से आप उनको शुभकामनाएं दे सकते हैं…..

शुभ जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ

हिन्दीभाषा.कॉम मंच के रचनाकार साथी बुद्धिप्रकाश महावर मन जी का ३ जुलाई को शुभ जन्मदिन है..इस पटल के माध्यम से आप उनको शुभकामनाएं दे सकते हैं…..

पक रही है कविता

श्रीमती संतोष श्रीवास्तव भोपाल (मध्यप्रदेश)  *********************************************************************** कविता जिंदगी की, अनिवार्य जरूरत हैl वह सुनती है, आत्मा की आवाज देखती है…l निर्दयी,निर्मम आतंक से एक ही पल में मिटते, पृथ्वी को दी हर बन्दे के रूप में ईश्वर की सबसे बेशकीमती सौगात कोl बंदूकों की होड़ बमों का जखीरा, आत्मघाती धमाकों से ढेर हुई इंसानियत कोl … Read more

जीवन चक्र

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ भावनाओं से ही भाव बनते हैं, भावों से ही भावनाएं चलती हैं। जीवन चक्र यूँ ही चलता रहेगा, बस दिल में आस्था रखो तुम सब॥ कहते हैं-जीवन बहुत अनमोल है, हर पल-हर घड़ी जीना जरूरी है। मूल सिध्दांत ये कहता है- खुद जीयो औरों को भी तुम जीने दो॥ स्नेह प्यार … Read more

बरसात

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** धरा की देख बैचेनी,पवन सौगात ले लाया, तपी थी धूप में धरती,गगन बरसात ले आया। घटा घनघोर है छाई,लगे पागल हुआ बादल- सजाकर बूंद बारिश की,चमन बारात ले आया॥ फ़ुहारों ने जमीं चूमी,हुई पुलकित धरा सारी, बहारों को ख़िलाकर के,हुई पुष्पित धरा सारी। खिले हैं बाग वन-उपवन,लगे ज्यूँ गात … Read more

माँ

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* माँ तेरा प्यार सरसता देता। जो दु:ख को नीरस कर देता। आते ही स्मरण माँ तुम्हारा- जग के दारुण दु:ख हर लेता। कैसे तेरा प्यार भुलाऊँ। कैसे तेरा ऋण चुकाऊँ। तेरे चरणों में है माँ- मैं अपना शीश झुकाऊँ। माँ मुझको आशीष अमर दो। त्रुटि मेरी क्षमा अब कर दो। … Read more

बलात्कार की व्यापकता…विचारने की जरूरत

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** जब से मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में लोगों के मरने की समस्या खत्म हुई है,मानव जनित एक नई समस्या ने आकर समाज को घेर लिया है। मानव द्वारा मानव का बलात्कार,उम्र और लिंग को नजरअंदाज करते हुए बलात्कार,निजी और सार्वजनिक स्थलों पर बलात्कार,दुधमुँहे बच्चों से लेकर मरणासन्न तक बलात्कार एवं … Read more