अंतरिक्ष स्वप्न

श्रीमती पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ अजमेर(राजस्थान) **************************************************** यह कलियुग है, और कलयुग भी। नित नूतन यंत्रों का आविष्कार, पल-पल होता परिष्कार। इनके बल पर ही देखे जाते, अंतरिक्ष में उड़ने के स्वप्न प्राप्त होते नित नूतन अनुभव। खोजे जाते सृष्टि के सूक्ष्म रहस्य, ग्रह,उपग्रहों के भिन्न-भिन्न घनत्व। प्राप्त सूचनाएं संभाव्य, मानव जीवन का निर्वाह नहीं रुकती … Read more

ईश्वर की तलाश खुद में करें

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* परमात्मा को अनेक रूपों में पूजा जाता है। कोई ईश्वर की आराधना मूर्ति रूप में करता है,कोई अग्नि रूप में तो कोई निराकार! परमात्मा के बारे में सभी की अवधारणाएं भिन्न हैं, लेकिन ईश्वर व्यक्ति के हृदय में शक्ति स्रोत और पथ-प्रदर्शक के रूप में बसा है। जैसे दही मथने से … Read more

पेड़ लगाओ-जीवन बचाओ

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** प्रकृति को सहेजने को अब सब मिल के तैयार हों, विनाश ना हो प्रकृति का,यह प्रयास बार-बार होंl जागो सभी बचाओ अब इस सृष्टि के आधार को, पेड़ लगाओ और बचाओ जीवन और संसार कोl पेड़ कट रहे हैं अंधाधुंध अब तेजी से चहुंओर, जंगल करके साफ फैक्ट्रियां लगाने में … Read more

लोकतंत्र का अपमान है दल बदलना

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** किसी एक दल के चुनाव निशान और नीतियों पर चुनाव जीत कर चुनाव बाद दूसरे दल में शामिल हो जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का खुला अपमान है। चुनाव जीतने के बाद दूसरे दल में शामिल हो जाना मतदाताओं की भावनाओं के साथ एक खिलवाड़ है। इसकी इजाज़त किसी … Read more

इतना बवाल न मचाएं,हिंदी सबकी

डॉ.साकेत सहाय ***************************************************************** शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल……… हिंदी आजादी के बाद से ही नेतृत्व की कुबुद्धि की वजह से अंग्रेजी से पराजित होकर भारतीय भाषाओं की सौतन बनकर उभरती है। भले वह सौतन हो या नहीं। समस्या यह भी है हिंदी को लेकर कई काल्पनिक धारणाएं मौजूद हैं,जिनसे किसी … Read more

कुछ नया सोचते हैं

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* जीवन के नये सफ़र में मेरे जीवनसाथी, लेकर हाथों में हाथ चलो! आज कुछ, नया सोचते हैं। जो तुमसे या मुझसे पहले, कभी किसी ने नहीं सोचा। तुम मेरी, तारीफ़ न करना मैं भी, नहीं बताऊंगी तुम्हारी कोई भूल। मेरे झल्लाने पर, तुम हौले से मुस्करा देना, मैं भी पी … Read more

ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध लेखक-अभिनेता गिरीश कर्नाड नहीं रहे

पद्मश्री,पदमभूषण से सम्मानित थे,दिग्गज हस्तियों ने दी श्रद्धान्जलि बेंगलरू। दक्षिण भारत और बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गिरीश कर्नाड का निधन सोमवार को हो गया है। जाने-माने अभिनेता,फ़िल्म निर्देशक ,नाटककार, लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता गिरीश कर्नाड बीते महीने ही ८१ वर्ष के हुए थे। लंबे समय से बीमार चल रहे श्री कर्नाड आखिरी बार ‘टाइगर … Read more

काश!

मदन मोहन शर्मा ‘सजल’  कोटा(राजस्थान) **************************************************************** काश! प्यार करने वाले मोम के बने होते, पिघल कर एक दूसरे में मिले तो होते, काश! सदा एक ही डाली के फूल होते, काँटों के बीच गुस्ताखी से खिले तो होते, काश! तोड़ देते जमाने की बेदर्द बेड़ियां, पत्थरों से कठोर दिल कुछ हिले तो होते, काश! ना होती … Read more

मेरे अहं

रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* मेरे अहं ! मेरे और तुम्हारे बीच लगातार… चलता रहता है घोर युद्ध… जिसमें अच्छी लगती है, तेरी पराजय मुझको… मेरे अहं! तुम नहीं जानते कितनी घृणा करती हूँ तुमसे मैं… तुम्हारी हत्या की बात तक सोचती हूँ… और सोचती हूँ, तुम्हारी अस्थियों को त्रिवेणी संगम में विसर्जित करने … Read more

संस्कार के बीज

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** दर्पण कितने बदले तुमने,चेहरे को तुम बदल न पाए। नेेह-स्नेह के भाव कहो क्यूँ,अब तक तुममें मचल न पाए। चाँद-सा चेहरा भोली सूरत,दर्शन में बड़े सुहाने हो। इस माटी में संस्कार के,बीज कहो क्यूँ पल न पाए। परिचय-ओमप्रकाश अग्रवाल का साहित्यिक उपनाम ‘बबुआ’ है।आप लगभग सभी विधाओं (गीत, ग़ज़ल, दोहा, … Read more