परिंदों को मिलेगी मंज़िल यक़ीनन

डॉ.चंद्रेश कुमार छतलानी  उदयपुर (राजस्थान)  ************************************************************************** वैसे तो हर विधा को समय के साथ संवर्धन की आवश्यकता होती है, लेकिन लघुकथा एक ऐसी क्षमतावान विधा बन कर उभर सकती है जो स्वयं ही समाज की आवश्यकता बन जाये,इसलिए इसका विकास एक अतिरिक्त एकाग्रता मांगता है। हालांकि,इस हेतु न केवल नए प्रयोग करना बल्कि इसकी बुनियादी … Read more

माटी की गुड़िया

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** मैं माटी की गुड़िया हूँ, मिट्टी में मिल जाना है। माना शक्ल मेरी भी थी, कहते लोग खजाना है। सुंदर आँखें,गोरा रंग था, लटें भी थीं घुंघराली होंठ गुलाबी,चाल हिरनिया, मैं भी थी मतवाली। क्रूर नापाक पंजों से,पर कर ना पाई सुरक्षा। जानवरों के उन पंजों ने, देखो मुझे … Read more

कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** सोच-सोच कर मन यह मेरा होता रोज अधीर, कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीरl कैसे उसको पाला होगा, पल-पल उसे सम्हाला होगाl बिना खिलाये माँ के मुँह तक, जाता नहीं निवाला होगाl हल्की-सी भी चोट लगे तो माँ को उठती पीर- कैसे लोग चला देते हैं बच्चों … Read more

उत्तराधिकारी

डॉ.स्वाति तिवारी भोपाल(मध्यप्रदेश) ********************************************************** ”मरने के बाद कितना निर्विकार लगता है चेहरा ?” ”एकदम निर्मल पानी की तरह स्वच्छ। लगता है बस अभी उठेंगे और आवाज लगाएंगे-समर…l” जिज्जी की निर्मल आत्मा अपने भाई के निर्विकार चेहरे को पढ़ रही थी। ”हाँ,प्राणविहीन चेहरे निर्विकार ही होते हैं! विकार तो सारे जीवित अवस्था में ही फलते-फूलते हैं।” … Read more

दलितों के घर भोजन

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* चार लोग कंधे पर एक शव ले जा रहे थे,तभी वह अचानक बोल उठा-“अरे!! आप लोग मुझे कहाँ लेकर जा रहे हैं।” उनके पीछे चल रही भीड़ डर गयी,यमदूत भी सतर्क हो गया-“ये लोग तुम्हें श्मशान ले जा रहें हैं,अब तुम अपने जीवन की अंतिम यात्रा पर हो।” यमदूत ने … Read more

हिंदी भाषा का अपने क्षेत्रों में वर्चस्व जरुरी

प्रो.जोगा सिंह विर्क *************************************************************** शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल…….. आदरणीय,वास्तविक समस्या यह है कि हिंदी विरोधियों का विरोध तो यह कहकर किया जाता है कि यह सब राजनीति है (जो बात बहुत हद तक सही है),पर हिंदी समर्थकों की राजनीति का विरोध नहीं किया जाता। हिंदी समर्थक हिंदी विरोधियों के … Read more

कल,आज और कल

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** जो कल हमपे है बीत चुका, उस कल की फिर क्यूँ चाह करें। जो कल हमने देखा ही नहीं, उस कल के लिए क्यूँ आह भरें। है आज हमारे साथ में तो, इस आज को जी भर के जी लें। खुशियों के सागर में डूबें, मस्ती के पैमाने … Read more

मेरे गाँव की हवा

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* हाले दिल गाँव का क्या सुनाऊँ आपको, पहले जन्नत,अब खण्डहर-सा लग रहा है। जिसे देख आँखें सुकून पातीं थी हवाएं, जो अब मन-ही-मन खटक रही है। सूनी वादियों मे जहाँ गीत गातीं थीं हवाएं, तनहाइयों में जहाँ गुनगुनाती थीं हवाएं। वन बाग़ उपवन को जहाँ महकाती थीं हवाएं, शहरों की … Read more

शांति को दिल में बसाना चाहते हैं

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** शांति को दिल में बसाना चाहते हैं। भक्तिमय संगीत गाना चाहते हैं। नफ़रतें जग से मिटा कर यार हम तो, प्रेम की गंगा बहाना चाहते हैं। लोग के दु:ख दर्द का उनको पता है, देश में वो क्रांति लाना चाहते हैं। जो हमारे साथ चलते हैं हमेशा, हम उन्हें … Read more

मौत खड़ी फुफकारती

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** अनज़ान नहि इस लोक में,दाता हो या दीन। मौत खड़ी फुफकारती,पर चाहत भयहीन॥ झूठ कपट सोपान से,चढ़ लिप्सा परवान। जन्म मरण ध्रुव मानकर,बनता नित धनवान॥ जो पाया सब तज धरा,तन धन अरु सम्मान। डेढ़ गज भी नसीब हो,जमीं मिले अवसान॥ चाहे कर जितना यतन,तैयारी सामान। नियत काल यमदूत … Read more