तमिलनाडु में हिंदी का विरोध क्यों ?

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** केन्द्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के मसौदे पर तमिलनाडु में विवाद का क्या कारण है,यह समझ से परे हैl हिंदी राष्ट्रभाषा विगत सौ वर्षों से बनने के लिए तरस रही है,इसका मुख्य कारण हिंदी को प्रोत्साहित करना नहीं,वरन सब स्थानीय भाषाओं को भी समानता का अधिकार देना हैl आज हमारे … Read more

नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं कई गुण

  कृष्ण कुमार सैनी ‘राज’ दौसा(जयपुर ) *************************************************** जी हाँ मित्रों, नेतृत्व करना एक ख़ास कला है,जो सामान्य व्यक्तित्व के अन्दर नहीं होती। श्रेष्ठतम नेता या नेतृत्व वही बन पाता है,जो लोगों के दिलों पर राज करता है,और जिसका व्यक्तित्व हर कोई स्वीकारता है। ऐसे व्यक्ति के साथ काम करने वाले लोग अपना सब-कुछ उस … Read more

सच्चाई झलक जाये

सूरज कुमार साहू ‘नील` भोपाल (मध्यप्रदेश) ****************************************************************** चल मैं कुछ करता हूँ सच्चाई झलक जाये शायदl मेरे लिए तेरे दिल में अच्छाई झलक जाये शायदl झूठों का सहारा लेकर आया होगा यदि शहर मेरे, मेरे अपने को भी छिपी बुराई झलक जाये शायदl हँस-हँस कर गले मेरे पड़ा रहता है हरदम जो तू, आज नहीं … Read more

हम हैं बस प्यार के..

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** क्या खूब सलीके इज़हार के प्यार के,बेकरारी के तराने, क्या कशिश अनसुलझे अहसास के, क्या समर्पण स्वयं का प्यार के निकुंज में नासमझी कहूँ ख़ुद की,या सौ बहाने, आरजू,आशिकी या दिलकशी, या अविरल भक्ति की रसधार में, हूँ समाए बहुरूप दिल के ताज़ मेंl चाहत चमन की गुलिस्तां … Read more

गरीबी

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- गरीबी ने हाल कुछ ऐसा बनाया, एक वक्त का खाना भी हाथ नहीं आयाl मांगकर के लाया था रोटी के टुकड़े, एक आवारा कुत्ता वो ले गया झपट केl भूखे को रातभर नींद भी न आई, हे ईश्वर ये गरीबी हमारे हिस्से ही क्यों आई ? कचरे से चुन-चुनकर … Read more

उपराष्ट्रपति के वक्तव्य का भी कोई परिणाम नहीं निकला

निर्मलकुमार पाटोदी इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** नरेन्द्र मोदी की बहुमत वाली मज़बूत और राष्ट्र हित के नाम पर जीती सरकार ने घुटने टेक दिए। वह भी तब,महात्मा गांधी की डेढ़ सौ वीं जन्म जयती वर्ष चल रहा है। गुजराती गांधी की भाषा और शिक्षा नीति को गुजरात के वर्तमान युग के शिखर पुरुष ने धराशायी करके रख … Read more

जन-वन की भागीदारी

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** पर्यावरण दिवस विशेष………….. पर्यावरण संरक्षण आज विश्व की सबसे बड़ी और प्रमुख समस्या में से एक है। आज भारत कईं क्षेत्रों में विश्व अग्रणी हो रहा है,परन्तु वनों के आकलन के आधार पर यूएन की सूची में भारत विश्व में आठवें क्रम पर है। मात्र २३ प्रतिशत वन भारत में शेष … Read more

पर्यावरण बचाना है

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़र देवास (मध्यप्रदेश) ******************************************************************************* विश्व पर्यावरण दिवस विशेष……………. सुनो भाइयों नारा ये जन-जन तक पहुँचाना है। पर्यावरण बचाना हमको, पर्यावरण बचाना है॥ आओ लगायें पौधे हम,ख़ूब बढ़ाएं हरियाली। करें वनों की पूर्ण सुरक्षा,वन उपजों की रखवाली। स्वच्छता का ध्यान रखें हम,बात ये सबको बताना है। पर्यावरण बचाना हमको… साफ़-स्वच्छ हो शहर हमारा, निर्मल … Read more

पेड़ और पानी की कहानी

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** पर्यावरण दिवस विशेष………….. पेड़ ने पानी से कहा- एक दिन हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, न पानी रहेगा पेड़ों में देने को… न पड़े रहेंगे हरियाली देने को। पानी का दुरुपयोग रुकता नहीं है, पेड़ों का कटना थमता नहीं है। सभी पक्के घरों की चाह करते हैं, फिर गर्मी आए तो … Read more

दो जून की रोटी

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** जिन्दगी में बहुत मेहनत के बाद, कमाई है,दो जून रोटी। अपना स्वेद बहाया और बड़ी, लगन से पाई है,दो जून रोटी। श्रम से झिलमिलाए हैं स्वेद विन्दु, तब खाई है,दो जून रोटी। बेकसूर होकर भी डाँट खाई है, तब थाली में आई है,दो जून रोटी। मजदूरी और मजबूरी में खपाई है, … Read more