चुभन पहचान लेना तुम

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** (रचना शिल्प:अरकान-१२२ १२२२ १२२२ १२२२) सदा रहती नहीं है ये जवानी मान लेना तुम। नहीं सब व्यर्थ हो जाये समझ इंसान लेना तुम। ख़ुदा के पास जाना है करम कुछ हो तेरा ऐसा, हकीकत में यहाँ भगवान को अब जान लेना तुम। ज़रा-सी जिंदगानी है गुमां करना नहीं … Read more

प्यार कौन करे

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************************************  ज़िंदगी फिर से ख़ार कौन करे। प्यार अब बार-बार कौन करेl प्यार मीरा-सी इक इबादत है, प्यार को दागदार कौन करेl जिसके किरदार में न खुशबू हो, ऐसी सूरत से प्यार कौन करेl प्यार है इक सदा खमोशी की, प्यार को इस्तहार कौन करेl प्यार की राह … Read more

बिन लड़े कौन जीत पाता है भला

राजेश पड़िहार प्रतापगढ़(राजस्थान) *********************************************************** (रचना शिल्प:बहर-२१२२ २१२२ २१२२ २१२) झाड़ आँगन आज कोई अब लगाता है भला। बिन लड़े ही कौन जग में जीत पाता है भला। बस यूँ ही तकदीर को कब तक रहोगे कोसते, देख ठोकर कौन फिर से चोट खाता है भला। राह की बाधा अनेक सर उठाये जो अगर, मुश्किलों से … Read more

अब कैसे कृष्ण,कैसे राम निकलेगा

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************* तेरा न बोलना बहुत देर तक खलेगा, एक न एक दिन तेरा घर भी जलेगाl नज़र बंद हो अपनी बोई नफरतों में, फिर रहीम और कबीर कहाँ मिलेगाl चाँद को चुरा के रात को दोष देते हो, इंतज़ार करो,आसमाँ भी पिघलेगाl जाति,धरम,नाम सबसे तो खेल लिया, अब कैसे कृष्ण,कैसे राम … Read more

छँटेगी रात काली…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** छटेगी रात काली और फिर होगा सवेरा भी, हँसो लेकिन ज़माना एक दिन आयेगा मेरा भी। भले ग़म ने तुझे चारों तरफ से घेर रक्खा है, जरा सूरज निकलने दो छँटेगा ये अँधेरा भी। नहीं रावण सिकंदर कंस का घर-बार बच पाया, कहीं तुमको न ले डूबे सुनो अभिमान … Read more

ख़ता मेरी बताते

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* कभी सोचा न था हर पल मेरी अब जान जाएगी, तुम्हारी याद जीवन भर मुझे हरदम सतायेगी। ख़ता मेरी बताते इस कदर तुम दूर मत जाते, मेरी धड़कन की हर सरगम किसे अब क्या सुनाएगी। तुम्हारे प्यार पर कितना भरोसा था मुझे हमदम, भरोसा तोड़ के कैसे भरोसा फिर दिलाएगी। सहर … Read more

मत ये सजा दीजिए।

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* मुद्दतों जो छिपाया,बता दीजिए, आग जिस्मो-ज़िगर की बुझा दीजिए। हमनशीं रूठकर दिल जलाती रही, पास उनको कोई फिर बुला दीजिए। गैर का दिल बसेरा बना आपका, प्यार की मेरे मत ये सजा दीजिए। आपको गैर की बज़्म भाने लगी, मेरी क्या अब जगह है जता दीजिए। ख़्वाब तो ख़्वाब हैं,टूटते हैं … Read more

दिले-दर्द अपना सुनाते नहीं

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** (वज़्न-१२२×३-१२, अर्कान-फऊलुन×३-फआ) बुलाए बिना हम हैं जाते नहीं। अग़र बोझ समझा निभाते नहीं। अदब से मिले जो भी मंज़ूर वो, कि ख़ैरात को हम उठाते नहीं। बरस बीत जाएं नहीं बात हो, दिले-दर्द अपना सुनाते नहीं। कई ज़ख़्म दिल में बता ना सकें, उधारी का मरहम लगाते नहीं। सियासत नहीं … Read more

किसान(मर्सिया)

शैलेश गोंड’विकास मिर्ज़ापुरी’ बनारस (उत्तर प्रदेश) ************************************************************************ (रचना शिल्प:फाएलातुन,फाएलातुन,फाएलातुन,फाएलुन) खेत में सूखा पड़ा था,अब्र में बरखा नहीं। थी किसानों को ज़रूरत तो फ़लक बरसा नहीं। आज फसलें पक गई जब,तू जरा ठहरा नहीं, हो गई बर्बाद फ़स्लें,फिर भी तू तड़पा नहीं। अब रुलाएगी सियासत खून के आँसू हमें, फिर से ले के आएगी वो,थाली में … Read more

करता नहीं ऐतबार आदमी

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** (रचना शिल्प:अरकान-२१२ २१२ २१२ २१२) हर कदम पर करे इंतजार आदमी, प्यार दिल में लिए बेशुमार आदमी। बात दिल की कहे तो कहे अब किसे, आज करता नहीं ऐतबार आदमी। इस जहां में सभी एक से एक हैं, कौन किसको कहे होशियार आदमी। गर मुहब्बत में खा जख़्म … Read more