मेरी दादी कहती थी
सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ******************************************************************** (रचना शिल्प:कुकुभ छंद आधारित, १६ + १४=३० मात्रा प्रतिपद,पदांत SS,युगल पद तुकांतता।) मिल-जुल कर इस घर में रहना,मेरी दादी कहती थी। समझौता जीवन का गहना,मेरी दादी कहती थी। कहती थी लड़ने से बच्चों,घर की बरकत जाती है। लाख जतन कर लो फिर लेकिन,कभी न रौनक आती है। … Read more