बुरा न मानो होली है…

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… सतुयग से कलयुग यानि आज तक वसंत ऋतु में सभी सनातन धर्मावलम्बी,बच्चे-बूढ़े,सब संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक- झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जो त्योहार पूरे उमंग,जोश व उल्लास के साथ मनाते हैं,उसी महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार का नाम है होली। वैसे … Read more

होली-नई शुरूआत का संदेश

दिपाली अरुण गुंडमुंबई(महाराष्ट्र)***************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… हिंदू काल गणना के अनुसार फागुन ऐसे तो अंतिम माह है,परंतु वह हमेशा नई शुरुआत की सीख देता है। फागुन की पूर्णिमा-होली के नाम से जानी जाती है। होली से संबंधित हिरण्य कश्यप तथा भक्त प्रहलाद की कहानी तो सब जानते हैं,जो हमें सिखाती है कि,हमें … Read more

आओ रंग दें हिंन्दुस्तान…

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… हृदय की तरंगों को,रंगों मे घोलकरखेलेंगे होली,गिले-शिकवे छोड़कर। रंगत दिलों की,फिर से उभर जाएसंगत बिछड़ों की,फिर से संवर जाए। ग़ुलाल के पानी से,राग-द्वेष धोकरकेसुड़े रस से,हवाओं में इतर घोलकर। महकाएँ दशों दिशा,दुश्मनी भुलाकररिश्ते भी महकाएँ,हर अहम् भाव छोड़कर। अवनी पर हो रहा,खेल रक्त की … Read more

फागुन का श्रंगार-होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… ‘जीवन फागुन बन गया,गाता मंगल गीत।आओ,हम अंकर भरे,नेह भरी नव प्रीत॥’होली वसंत का एक उल्लासमय पर्व है। होली को ‘वसंत का यौवन’ भी कहा जाता है। इस समय प्रकृति सरसों की पीली साड़ी पहनकर किसी की राह देखती हुई प्रतीत होती है। हमारे पूर्वजों … Read more

सम्मान चाहता है नारी अस्तित्व

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* यह सर्वविदित है कि आज २१वीं सदी में नारी पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है,पर यह कहना गलत नहीं होगा कि नारी ने इस मुकाम को पाने के लिए युगों-युगों से युद्ध किया है । आज भी उसका युद्ध जारी है। कहते हैं भारतीय सभ्यता ने हमेशा नारी को पूज्य … Read more

रामराज्य में लोकतान्त्रिक मूल्य

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)********************************** लोकतन्त्र के दो रूप कहे जा सकते हैं,एक दण्डात्मक व दूसरा गुणात्मक। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने लोकतन्त्र की सुन्दर व्याख्या करते हुए इसे लोगों पर लोगों के द्वारा लोगों की व्यवस्था बताया,लेकिन इसमें मजबूत राष्ट्र,सुरक्षा प्रणाली और निष्पक्ष न्यायपालिका की अनिवार्यता अपरिहार्य है। व्यवस्था सुन्दर तो है, परन्तु इसका क्रियान्वयन … Read more

नहीं बनेगा भारत मोहरा ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत,अमेरिका,जापान और आस्ट्रेलिया-इन चार राष्ट्रों के चौगुटे का जो पहला शिखर-सम्मेलन हुआ, उसमें सबसे ध्यान देनेवाली बात यह हुई कि किसी भी नेता ने चीन के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोला, जबकि माना जा रहा है कि यह चौगुटा बना ही चीन को टक्कर देने के लिए है। इसका नाम है-क्वाड … Read more

निजीकरण कितना वास्तविक…

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** आज सरकार अंधाधुंध निजीकरण की वकालत कर रही है,सरकारी कर्मचारियों के निकम्मेपन की हर जगह चर्चा हो रही है,पर आइए इस पर विचार करते हैं।दूध में पहले केवल पानी मिलाया जाता था,फिर मलाई मारी जाने लगी,और अब यूरिया और डिटर्जेंट वाला दूध मिलता है। अपवाद छोड़ दें तो आपके हमारे घर में … Read more

समाज में हिंदी

विवेक गुप्ता*************************************** पीढ़ियों का अंतर तो हर दौर में रहा है,बुज़ुर्ग और युवा पीढ़ी के बीच संवाद की कमी हमेशा ही रही है,फिर आज के वृद्ध ख़ुद को अधिक उपेक्षित क्यों महसूस करते हैं ?कारण है,उनका भावी पीढ़ी से संवाद भी कम या लगभग ख़त्म हो गया है। महज़ तीन-चार दशक पहले तक बच्चों और … Read more

‘वेदने तू धन्य है री!’ दर्द का दरिया

मनोज कुमार सामरिया ‘मनु’जयपुर(राजस्थान)*************************************** आधुनिक मीरा महीयसी महादेवी वर्मा को समर्पित यह गीतांजलि विरह गीतों का नायाब नमूना है। यह पुस्तक ६२ गीतों को समेटे हुए है। वेदना को संबोधित शीर्षक गीत ‘वेदना तू धन्य है री!’ महाकवि पंत की इन पंक्तियों को प्रमाणित करता जान पड़ा-‘वियोगी होगा पहला कवि,आह से उपजा होगा गान।निकलकर आँखों … Read more