बदरी…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** देखो बादल आ गया, भरकर तन में नीर। भर-भर गागर ढोलता, होकर तनिक अधीर॥ नदिया सागर से कहे, लगा रही थी टोह। हरियाली होकर धरा, मन को लेती मोह॥ बादल दौड़ें गगन में , धरकर नव-नव रूप। भांति-भांति के रंग ले, लगते नवल अनूप॥ ओ काले बादल सुनो, जाओ पिय … Read more

दुश्मन हम ख़ुद प्रकृति के

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** जल प्लावन आधी धरा,शेष शुष्क बदरंग। महाकाल धन जन जमीं,जलज बिखेरे जंग॥ जान माल बेघर प्रजा,बाढ़ त्रस्त निर्दोष। रोग शोक प्रसरित धरा,त्राहि-त्राहि उदघोष॥ दुश्मन हम ख़ुद प्रकृति के,कर्तन तरु पाषान। निजहित में हम भर सरित,आपद खुद हम जान॥ धन कुबेर तो महल में,आपद में बस आम। फेंक रोटियाँ … Read more

शहर

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** लगी हुई है शहर में,जैसे कोई आग। ले प्रातः से रात तक,रहा आदमी भाग॥ ढूँढ रहा है शहर में,आकर क्यों तू प्यार। सम्बन्धों का है यहाँ,पैसा ही आधार॥ शहर बात उससे करे,हो जिससे कुछ काम। बिना स्वार्थ सम्बन्ध का,यहाँ नहीं है नाम॥ शहरों के ऊँचे भवन,पत्थर दिल के लोग। है … Read more

पैसा बोलता है

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** जग में सबसे है बड़ा,देखो पैसा आज। इसके बिन होता नहीं,बड़े-बड़े से काजll पैसा है तो मान है,पैसा से ही यार। पैसा से परिवार है,पैसा से संसारll बिन पैसा भोजन नहीं,भूखे हैं बेहाल। सज्जन माँगे भीख हैं,होते मालामालll पैसा से यह जान है,पैसा से ईमान। पैसा ही भगवान … Read more

देश विरोधी बदजुबां

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** लघु जीवन संसार में,सज बाज़ार जम़ात। वतन फ़िदा होंगे सभी,राष्ट्रधर्म ज़ज़्बातll सुलग रहा फिर गैंग वह,लौटाने सम्मान। खतरा उनको दिख स्वयं,हिफ़ाजत ए आनll पाये जो सारी खुशी,पूरे सब अरमान। उसी राष्ट्र में आज वे,कहते निज अपमानll झोली भर दे गालियाँ,नित भारत सरकार। पर बाधित उनकी नज़र,अभिभाषण अधिकारll रायसीना … Read more

मानसून

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** मानसून की आस में,कृषक का यह विश्वास। बरसेगा जल अब यहां,बुझे सभी की प्यासll धरती सूखी ग्रीष्म में,तड़प रहे बिन नीर। मेघराज पर दृष्टि है,मोर,पपीहा,कीरll चातक का प्रण हिल रहा,टूट रहा है धीर। इंद्रदेव से विनय कर,दे दो थोड़ा नीरll खेत और खलिहान सब,पनघट धारे रीत। बरसो बादल अब दया,कर … Read more

सावन

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** सावन जो आये यहाँ, लेकर मधुर फुहार। जी भरकर भीजूँ सखी, गाऊँ मैं मल्हार॥ अब सावन आता नहीं, जो भीजूँ पिय संग। सूखा सावन देख के, उर में नहीं उमंग॥ सावन के घन आ यहाँ, जोहूँ तोरी बाट। बिन भीजे सूखी कलम, सूखे उर के पाट॥ सावन को देखा नहीं, … Read more

उपकार

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** भला सभी का कर चलो,और करो उपकार। दीन-हीन को दान दो,स्वच्छ रखो व्यवहार॥ उपकारी बन साथ में,करना ऐसा काम। दु:ख में खुशियाँ दे चलो,अमर रहेगा नाम॥ भलमानुष दाता बनो,हरो सकल सन्ताप। दीन-दुखी परिवार को,होय न पश्चाताप॥ उपकारी मानव बनो,करो सदा उपकार। परहित में सुख बाँटिये,लो अपनों-सा प्यार॥ नदिया … Read more

लगा रोग हरिनाम का

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** रे मन भज जगदीश को,शरणागत हरिनाम। तिलक भाल श्रीखण्ड का,पीताम्बर अभिरामll नारायण शारंगधर,भक्तिप्रेम सुखधाम। पीताम्बर गोलोक सुख,पावन हो विश्रामll रमा चित्त हरि भजन में,भवसागर हों पार। कहाँ फँसा माया जगत,राम नाम जग सारll लगा रोग हरिनाम का,क्या जीवन संसार। रमता मन निर्मल बने,जीवन का आधार॥ प्रेम सदा अनमोल … Read more

था जीवन का सार

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** कबिरा इतना लिख गये,क्या लिख्खें हम यार। उसने तो की साधना,हम करते व्यापार॥ तुलसी जैसा तप कहाँ,कहाँ कलम में भार। अब घसियारे कलम के,मांगे पद दरबार॥ मीरा ने श्रंगार में,जपा कृष्ण का नाम। आज सुरीले कंठ की,चाहत केवल दाम॥ सूर देखते हृदय से,बाल कृष्ण का रूप। लेकिन अब डूबे नयन,काम … Read more