पिता
बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचना शिल्प:विधान-१२२२ १२२२ १२२२ १२२२) सजीवन प्राण देता है,सहारा गेह का होते। कहें कैसे विधाता है,पिताजी कम नहीं होते। मिले बल ताप ऊर्जा भी,सृजन पोषण सभी करता। नहीं बातें दिवाकर की, पिता भी कम नहीं तपता। मिले चहुँओर से रक्षा,करे हिम ताप से छाया। नहीं आकाश की बातें,पिताजी में यहीं माया। … Read more