भारत को इस्लामी राष्ट्रों की चुनौती

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** भारत भी कमाल का देश है। इसकी वजह से इस्लामी देशों में फूट पड़ गई है। दुनिया के ५७ इस्लामी देशों का अब तक एक ही संगठन है (ओआईसी),लेकिन अब एक दूसरा इस्लामी संगठन भी उठ खड़ा हुआ है। इसका नेतृत्व मलेशिया के राष्ट्रपति महाथिर मोहम्मद और तुर्की के राष्ट्रपति … Read more

नए वर्ष के नए संकल्प

राजेश पुरोहित झालावाड़(राजस्थान) **************************************************** लो आ गया नूतन वर्ष,दिल से करें सभी दो हज़ार बीस का अभिनन्दन। ठिठुरती ठंड में गरीबों को कम्बल बांटते समाजसेवी नेताओं की सोशल मीडिया पर सेल्फी दिखने लगी। कहीं मोमबत्ती जलाकर बेटी की तस्वीर को लिए शहर में `बेटी बचाओ` के नारे लगाता जनसमूह दिखाई देता है। जीएसटी,धारा ३७०, भारत-पाक … Read more

आधुनिक बनाम पुरातन ज्ञान-विज्ञान

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ मुम्बई(महाराष्ट्र) *************************************************************** जब कोई खगोलीय घटना घटती है,तो विभिन्न टी.वी. चैनलों पर वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक गुरुओं के बीच वैचारिक संघर्ष साफ दिखाई देता है। लगता है दोनों में एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ लगी है। अगर यह कहूँ कि,इस मामले में मैं अक्सर स्वयं को वैज्ञानिकों के नहीं, बल्कि कथित आध्यात्मिक … Read more

हिन्दी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:प्रसार की लकीरें

डॉ. ओम विकास *************************************************************** २०वीं सदी में आर्थिक विकास का आधार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी रहा। नवाचार एवं आविष्कारोन्मुखी प्रवृत्ति से समाज विकसित और अविकसित वर्गों में बँटने लगे। २१वीं सदी में संज्ञानिकी का प्रबल प्रभाव है। लोक संस्कृति की संरक्षा की चिंता बढ़ने लगी है।प्रतिवर्ष २ प्रतिशत विश्व भाषाओं का लोप होता जा रहा है। … Read more

आम-बजट में राहत की उम्मीद

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* देश में बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी,व्यापार की टूटती साँसें,आर्थिक सुस्ती एवं विकास की रफ्तार में लगातार आ रही गिरावट चिंता एवं चिन्तन का कारण है। जनता महंगाई एवं नवीन आर्थिक परिवर्तनों से जार-जार है, लोग बढ़ती महंगाई को लेकर चिंतित हैं,वे चाहते हैं कि आयकर सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। वित्तमंत्री से इस बार … Read more

मानवता से हैवानियत पर सख्ती जरूरी

पुष्कर कुमार ‘भारती’ अररिया (बिहार) ********************************************************** हमारे समाज में कुछ ऐसी भी घटना घट जाती है,जिसे देख बिना कुछ लिखे रहा भी नहीं जाता है। समझ में यह नहीं आता है कि, आखिर हम मानव किस ओर बढ़ रहे हैं ? मानवता की ओर या हैवानियत की ओर! हम आज महिला सशक्तिकरण की ओर पहला … Read more

क्या ‘राम मंदिर’ की सियासी कमाई ‘एनआरसी’ में गंवा रही भाजपा ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** क्या राम मंदिर से कमाई राजनीतिक जमीन भाजपा एनआरसी और सीएए में गंवा रही है ? क्या राष्ट्रीय मुद्दों का रथ राज्यों की सियासी जमीन पर पंक्चर हो रहा है ? क्या राज्यों में हो रही लगातार हार से भाजपा कोई सबक नहीं ले रही है”? संकल्पशक्ति और हठवादिता में बुनियादी … Read more

अधिनियम बनाम गढ़े गए विवाद

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** मुद्दा ‘नागरिक संशोधन कानून’………… दुनिया में हर विवाद का हल व समस्या का समाधान है,परन्तु गढ़े गए विवादों का जब तक निपटान होता है,तब तक बहुत अनर्थ हो चुका होता है और सिवाए पछतावे के कुछ हाथ नहीं लगता। नागरिकता सन्शोधन अधिनियम पर पैदा हुए विवाद को भी इसी श्रेणी में … Read more

आजाद भारत में कितनी आत्मनिर्भर हैं महिलाएं!

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** लैंगिक समानता में भारत ११२ वें स्थान पर पहुंचा,जिनमें शिक्षा,स्वास्थ्यऔर राजनीतिक ताकत में महिलाओं के साथ भेदभाव ख़त्म होने में ९९ वर्ष लगेंगे,ये बात विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट २०२० में बताई गई हैl देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं। इन सात दशकों में भारत … Read more

क्यों भार लगने लगती है जिन्दगी ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* जीवन से जुड़ा एक बड़ा सवाल है कि विषम परिस्थितियां क्यों आती है ? जिन्दगी क्यों भार स्वरूप लगने लगती है ? क्यों हम स्वयं से ही खफा से रहने लगते हैं ? इसका सबसे बड़ा कारण है हमने जीने के जो साफ-सुथरे तरीके थे या जो जीवनमूल्य थे,उन्हें भुला दिया … Read more