राष्ट्रहित में सम्मान करना चाहिए कानून का

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** मुद्दा ‘नागरिकता संशोधन कानून’………. नागरिक कानून हम सब देशवासियों के लिए,नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वह अपने देश की सबसे बड़ी हानि कर रहे हैं। जो इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं,वह अपने देश का नुकसान ही कर रहे हैं,क्योंकि हम राष्ट्र … Read more

अब अदालत से ही आशा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** मुद्दा ‘नागरिक संशोधन कानून’………………. संसद ने किसी कानून को स्पष्ट बहुमत से पारित किया हो और उसके खिलाफ इतना जबर्दस्त आंदोलन चल पड़ा हो,ऐसा स्वतंत्र भारत के इतिहास में कम ही हुआ है। ये तो नरेंद्र मोदी की किस्मत है कि इस समय देश में कोई अखिल भारतीय नेता नहीं … Read more

फूल की भूल

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** असल जीवन की यह कहानी ६ दिसम्बर १९५९ से सम्बद्ध है। सम्मान,अपमान और निष्कासन की एक ऐसी घटना घटी थी जिसने हर्ष-विषाद का समन्वित इतिहास रच दिया था,लेकिन दुर्भाग्यवश इतिहास ने उस यथार्थ को अपने आँचल में कोई विशेष स्थान नहीं दिया। आइए चलते हैं झारखंड (तत्कालीन बिहार) के धनबाद … Read more

विरोध बिल्कुल अनुचित,बारीकी से पढ़ने की जरूरत

इलाश्री जायसवाल नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* मुद्दा `नागरिकता संशोधन कानून`…………. ‘नागरिकता संशोधन कानून’ को आलोचक,नागरिक तथा लेखक की दृष्टि से पढ़ा। इस कानून के विषय में पढ़ने पर मुझे ज्ञात हुआ कि इस कानून के तहत भारत सरकार बांग्लादेश,अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान देशों से आए हुए अल्पसंख्यक शरणार्थियों जो बौद्ध,हिंदू, सिख,जैन,पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारत … Read more

तुझमें राम,मुझमें राम और हम सबमें राम

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** किसी भी राष्ट्र का अस्तित्व और अस्मिता,स्वत्व और स्वाभिमान उस देश के श्रद्धा व आस्था केन्द्रों,महापुरुषों के स्मृति स्थलों तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व संवर्धन पर निर्भर करता है। यथा यह इतिहास का कड़वा सच है कि बर्बर विदेशी आक्रांताओं ने हमारे हजारों श्रद्धा,पुण्य और प्रेरणा केन्द्रों को ध्वस्त कर … Read more

कहां सावरकर और कहां राहुल ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हमारे आजकल के नेताओं से यह आशा करना कि वे नेहरु, लोहिया,श्यामाप्रसाद मुखर्जी,विनोबा,अटलबिहारी वाजपेयी और नरसिंहराव की तरह पढ़े-लिखे होंगे,उनके साथ अन्याय करना होगा। वे सत्ता में हों या विपक्ष हों,उनका बौद्धिक स्तर लगभग एक-जैसा ही होता है। सलाहकार तो उनके भी होते हैं। लेकिन वे अपने स्तर के लोगों … Read more

समाज में मनुष्यता के प्रतिस्थापक भगवान पार्श्वनाथ

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** सनातन धर्म की पावन गंगोत्री से निकले विभिन्न धर्मों में जैन धर्म भारत का सर्वाधिक प्राचीनतम धर्म है। चौबीस तीर्थकंरों की समृद्ध जनकल्याण की परम्परा,जो वर्तमान अवसर्पिणी काल में ऋषभदेव से लेकर महावीर तक पहुंची,उसमें हर तीर्थंकर ने अपने समय में जिन धर्म की परम्परा को और आत्मकल्याण के मार्ग … Read more

अब ‘राशन एकीकरण’ की तैयारी,क्या हाजमा भी एक होगा ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’ के बहाने ‘राष्ट्रीय एकीकरण अभियान’ के तहत केन्द्र की मोदी सरकार की सूची में अगला क्रम अब राशन कार्ड का है। इसे सरकार ने ‘एक राष्ट्र,एक राशन कार्ड’ नाम दिया है। इसका मानक प्रारूप हाल में राज्यों को जारी करके कहा गया है कि,वे राशन कार्ड के … Read more

निरर्थक संकट में फंसी भाजपा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** मुद्दा `नागरिकता संशोधन कानून`………… कोई कानून हमारी संसद स्पष्ट बहुमत से बनाए और उस पर इतना देशव्यापी हंगामा होने लगे,ऐसा याद नहीं पड़ता। संसद के दोनों सदनों ने ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ पारित किया,जिसके अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आनेवाले शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी,लेकिन यह नागरिकता … Read more

अपराध और अपराधियों के संरक्षण में नेताओं का बड़ा योगदान

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** एक कहावत है कि जब कोई चूहा बिल्ली को आँख दिखाए,तो मान कर चलना चाहिए चूहे का बिल नजदीक हैl आज देश में प्रजातंत्र होने से,जनता की सरकार बनी,यानि चुने हुए प्रतिनिधि ही पंच,सरपंच,विधायक,सांसद उसके बाद मंत्री,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री इत्यादि बनते हैंl इन सबको बनने के लिए प्राथमिक अर्हता है आपका दबदबा समाज … Read more