हिंसा से बढ़ता सामाजिक अलगाव एवं अकेलापन
ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* आज देश ही नहीं, दुनिया में हिंसा,युद्ध एवं आक्रामकता का बोलबाला है। जब इस तरह की अमानवीय एवं क्रूर स्थितियां समग्रता से होती है तो उसका समाधान भी समग्रता से ही खोजना पड़ता है। हिंसक परिस्थितियां एवं मानसिकताएं जब प्रबल हैं तो अहिंसा का मूल्य स्वयं बढ़ जाता है। हिंसा किसी … Read more