११वीं-१२वीं में २ भारतीय भाषाएं जरूर पढ़ाई जाएँ

प्रेमपाल शर्मा********************************* एनसीईआरटी का स्वागत… दिल्ली और उसके आसपास नोएडा, गाजियाबाद के ९० फीसदी निजी उर्फ पब्लिक विद्यालयों में ११वीं १२वीं में हिंदी विषय नहीं पढ़ाया जाता। विज्ञान (पीसीएम) के छात्र विशेष रुप से हिंदी नहीं पढ़ते! इनमें ५० फीसदी में नवीं कक्षा से ही अंग्रेजी के साथ कोई और विदेशी भाषा पढ़ाई जाती है। … Read more

क्यों आवश्यक है समान नागरिक संहिता ?

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृतकाल में समानता की स्थापना के लिए अपूर्व वातावरण बन रहा है, इसके लिए वर्तमान में समान नागरिक कानून की चर्चा बहुत ज्यादा है। यह भारत की बड़ी जरूरत है। समानता एक सार्वभौमिक, सार्वकालिक एवं सार्वदेशिक लोकतांत्रिक मूल्य है। इस मूल्य की प्रतिष्ठापना के लिए समान कानून की अपेक्षा है। राष्ट्र … Read more

भारतीय समाज, हमारी भाषाएँ और चिंता की लकीरें…

डॉ. रामवृक्ष सिंहलखनऊ (उप्र)******************************* भारतीय समाज को हर काम के लिए छोटा रास्ता चाहिए। मेहनत न पड़े। लाभ अधिक हो। इसीलिए हम लोग सम्यक श्रम भी नहीं करते। उधर अंग्रेजी वाले बड़े चतुर और अध्यवसायी हैं। लगे रहते हैं अपने काम में‌। मेरा विश्वास है कि, अगर भारतीय समाज की यही दशा रही तो अगले … Read more

अक्ल का अजीर्ण

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* ‘आदिपुरूष’…. जैसे एक मन दूध में २५० ग्राम दही डाल देने से पूरा दूध फट जाता है, खीर को यदि हींग के बर्तन में रख दिया जाए तो उसका स्वाद ख़राब हो जाता है, उसी प्रकार फिल्म की कहानी में कुछ अंश गलत डल जाने से सब कुछ गड़बड़ हो जाता है। मुझे … Read more

हिन्दी से हिंग्लिश का सफर

सत्यजीत कुमार द्विवेदी************************************ मैं मानता हूँ कि भारत विविधताओं और अनेकता में एकता की कसौटी पर खरा उतरता है, लेकिन हम कई अन्य देशों को देखें, जहां पर एक राष्ट्र एक भाषा को परिमार्जित होते हुए देखा जाता है, जबकि वहां भी कई भाषाएं और बोलियां विद्यमान है, साथ ही वो देश अपनी भाषा के … Read more

अनमोल सीख

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* जीना जैसे पिता…. मेरे पिताजी बहुत ही स्वाभिमानी, वलिष्ठ, निडर व साहसी थे। ऐसा सुना था कि, एक बार युवावस्था में दोस्तों के बीच आपसी चर्चा के दौरान किसी ने रात भर अकेले में श्मशान में बिताने की चुनौती दी, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार ही नहीं किया, बल्कि उसी अमावस्या वाली … Read more

जीवित पशुओं का आयात-निर्यात सरकार का घोर निंदनीय कुकृत्य

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* हमारा देश भारत एक हिंसक देश है, जहाँ दिन-रात खून-खराबा होना आम बात है और आजकल यहाँ पर खून की नदियाँ भी बहने लगी है। यहाँ प्रेम, शांति, भाई-चारा का कोई स्थान नहीं है। सरकार दुहमुँही है, जिसको दोगली भी कहते हैं। वह हमारा दूध-घी छीनकर अपना कोष भरती है। सरकार चार्वाक सिद्धांतों … Read more

परोपकार

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** सोनिया आज अपने बेटे के साथ एक मनोचिकित्सक के पास पहुंची। उसका परिचय लेते हुए डॉक्टर साहब ने जांच शुरू ही की थी कि वह कहने लगी-“सर मेरी जिंदगी बिल्कुल बेकार हो चुकी है, सबका बोझ बन चुकी हूँ। मुझे पैसे की तो कोई कमी नहीं, मगर मुझसे खुशियाँ कोसों दूर है। … Read more

बंगाल में भाषाई ध्रुवीकरण:जातिय संघर्ष की दस्तक तो नहीं ?

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल )**************************** एक छोटी-सी चिंगारी को शोला बनते देर नहीं लगती, यदि समय रहते उसे बुझा न दिया जाए। ‘बांग्ला पक्खो’ जिस तरह ज़हर उगल रहा है, बंगाल के लिए शुभ संकेत नहीं है। आखिर मणिपुर में जातिय हिंसा यहाँ तक पहुँचेगी, किसी ने सोचा था क्या ?१५ मार्च २०२३ को पश्चिम … Read more

चुनावी रथ में सवार दलों की सत्ताकांक्षा

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृतकाल के पहले लोकसभा चुनाव की आहट अब साफ-साफ सुनाई देे रही है। भारत के सभी राजनीतिक दल अब पूरी तरह चुनावी मुद्रा में आ गए हैं और इसी के अनुरूप बिछ रही चुनावी बिसात में अपनी गोटियाँ सजाने में लगे दिखाई पड़ने लगे हैं। २०२४ लोकसभा एवं इसी वर्ष होने … Read more