कोई कैसे समझे

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचनाशिल्प:१२२ १२२ १२२ १२२) कोई कैसे समझे मुसीबत हमारी, मुझे तो पता है विवशता तुम्हारी। सिमटती हुई रौशनी के सहारे, सफ़र है तुम्हारा अँधेरों में जारी। कभी मत कहो ये कि मजबूरियाँ हैं, अँधेरों से लड़ने की आई है बारी। अँधेरों से लड़ते रहे तुम अकेले, सभी सूरमाओं पे तुम ही … Read more

प्रेम-स्नेह खो गया …

निशा गुप्ता  देहरादून (उत्तराखंड) ************************************************************* कैसा प्रेम,किसका प्रेम, कौन करे किस पर विश्वास। प्यार शब्द अब खो गया, हो गया अब ये आभास। हमेशा गद्दारी उसने ही की, जिस पर किया हमने विश्वास। प्रेम-स्नेह से सींच कर बागिया एक बनाई थी, कलियाँ कोई उस उपवन की बेदर्दी से नोंच गया। सो गई नन्हीं परी, घुट … Read more

दीमक बनकर चाट रहा स्वांग

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** बेटियाँ बचाने का नारा, सुनकर माँ हरषायी थी। तब ले के बिटिया की बलाएँ, वह ममता बरसायी थीll नहीं जानती थी वह माता, यहाँ दरिंदे रहते हैं। दरिंदगी की हदें पार कर, खुद को मानव कहते हैंll नन्हीं कलियाँ नहीं सुरक्षित, अपने ही गलियारों में। जीना उनका दुष्कर हो गया, … Read more

कैसे सहन करें

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* मानवता की पीड़ा का,आक्रोश किस तरह सहन करें, अपने हाथों से अपने पौरुष का कब तक,क्षरण करें| लोकतन्त्र के नाम जहाँ पर,रक्त बहाया जाता हो, जहाँ धर्म के आलय में,गोमांस पकाया जाता हो, संविधान के पन्ने जब,ईधन की भांति सुलगते हो, अमृतरस के बदले में,मदिरा के जाम छलकाते हो| ऐसे में … Read more

सीख

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- कर्म कर फल पाएगा, व्यर्थ कुछ ना जाएगाl सार्थक जीवन बिता ले, वर्ना फिर पछताएगाl चार दिन की जिन्दगी, कब समझ में आएगाl कर्म अच्छा या बुरा हो, जस किया तस पाएगाl झूठे हैं रिश्ते ये नाते, टूट ये भ्रम जाएगाl कर्म कर ले पुण्य का तू, साथ वो … Read more

चाँदनी

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* तुम चाँदनी में नहा करके आई हुई हो, ख़ुदा की कसम क्या गज़ब ढा रही हो। गालों को चूमें ये जुल्फें जो तेरी, हौले से इनको हटा क्यों रही हो। दीवाना हूँ मेँ इन आँखों का तेरी, पलकों का पनघट छुपा क्यों रही हो। है चाँदनी-सा शीतल ये रूप … Read more

अब क्या बचा है गाँव-सा

दौलतराम प्रजापति ‘दौलत’ विदिशा( मध्यप्रदेश) ******************************************** आज अनबन क्या हुई घर बार से, लोग आ कर लग गए दीवार से। कौन जिम्मेवार है इस जुर्म का, राज साया हो गए अखबार से। गाँव में अब क्या बचा है गाँव-सा, ला रहे हैं ढूध हम बाजार से। योजनायें क्या हुई सरकार की, पूछियेगा जा के लंबरदार से। … Read more

अब चुप न रहो

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** खामोशी तोड़ दो, अब चुप न रहोl कोई नहीं समझेगा, दु:ख-दर्द यहाँ तेरा बात मान लो मेरी, अब जिद्द छोड़ दोl खामोशी तोड़ दो- अब चुप न रहोll आज की नारी हो, सब पर भारी हो अधिकार जान लो, मन से मन जोड़ लोl खामोशी तोड़ दो- अब चुप न … Read more

पिता

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** १६ जून `पितृ दिवस’ विशेष………. चले साथ में जब पिता,मेरी उँगली थाम। दूर-दूर तक था नहीं,तब चिंता का नामll लगता है जैसे पिता,घर की चारदिवार। आ पाती ना आँधियाँ,जिसको करके पारll सब सोते हैं चैन से,भर मन में उल्लास। जब तक घर में है पिता,डर ना आते पासll जीवनभर ढोते … Read more

वाह रे देश के चौकीदार

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** वाह रे देश के चौकीदार, कमर तोड़ महँगाई बढ़ती। थमता नहीं है भ्रष्टाचार, वाह रे देश के चौकीदार॥ आफ़त में पड़ा अब जन जीवन है, जीवन मुश्किल बहू-बेटियों का। बढ़ता जा रहा रोज बलात्कार, वाह रे देश के चौकीदार॥ भूख मरी फैली भारत में, कानून व्यवस्था ताक पर रखकर। नेता … Read more