आदर्श

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** भिन्न-भिन्न नर जातियां, भिन्न-भिन्न संस्कार हम न किसी आदर्श का, कर सकते प्रतिकार। हर नर का कर्तव्य है, हृदय ग्राह्य आदर्श जीवन में लेकर चलें, हेतु प्रगति उत्कर्ष। व्यवहारिक होता नहीं, बिना विचार-विमर्श मतान्धता धर्माधन्ता, पर निर्मित आदर्श। मन स्वाधीन रहे सदा, रहे उच्च आदर्श फलीभूत होगा तभी, यह जीवन … Read more

रातभर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* नींद आई न मुझको यूँ तेरे बिना, करवटें मैं बदलती रही रातभर। आसमां भी झुक के आता है देखो, धरा से मिलन को यहाँ रातभर। तेरी यादें भी लिपटीं मेरे जिस्म से, धड़कती रहीं बन के दिल रातभर। यूँ गगन में चमकते सितारे बहुत, कोई मेरा भी है क्या … Read more

अरिहंतों को नमन

छगन लाल गर्ग “विज्ञ” आबू रोड (राजस्थान) **************************************************************************** दिव्य लोक की राह में,रश्मि पुंज के मंत्र। महावीर क्षण साधना,जीवनभर का तंत्र॥ अरिहंतों को नमन है,सिद्धजन नमस्कार। साधक संतों नमन है,कृपा करो करतार॥ मंत्र साध सदगुण सधे,रहे न दु:ख जंजाल। शब्द भाव अनुसार ही,अंतस सच खंगाल॥ अरिहंती मंगल मिले,साध रहे है सिद्ध। माया पंछी लोभ में,डूब … Read more

किसी को मिलती मलाई,किसी को बासी भात नहीं..

लालचन्द्र यादव आम्बेडकर नगर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************************** आज यहां क्या लोकतन्त्र है! कुछ कहने की बात नहीं है। जो जितना पाये ले जाये, मुझे कोई आघात नहीं है। किसी को मिलता दूध-मलाई, किसी को बासी भात नहीं है॥ लोकतंत्र में जनमत की कुछ, ताक़त,या औकात नहीं है! सर्दी ठिठुर-ठिठुर कर बीती, क्या कुचले! जज्बात नहीं हैं! … Read more

नजर का वार

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** नजर का वार दिल पर कर गया है। नयन की मार से वह मर गया है। जिसे देखा नहीं हमने नजर भर, उसी से नैन मेरा लड़ गया है। दगा जिसने दिया है प्यार को ही, समझ लो प्यार से जी भर गया है। भयानक आंधियों को देखते ही, … Read more

सुहानी शाम

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* शाम सुहानी आ गई,पंछी करते शोर। लौट रहे हैं नीड़ को,बाँध प्रीत की डोरll बैलों की घंटी बजे,जस वृन्दाबन धाम। ग्वालों की टोली लगे,संग श्याम बलरामll सतरंगी आभा लिये,बिखरे हो सिंदूर। अरुण किरण की लालिमा,देखो कुदरत नूरll शीतल मंद सुगंध पवन,और सुहानी शाम। बन जाऊँ मैं राधिका,तुम बन जाओ श्यामll … Read more

ये कैसी प्यास है

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ भावना और भाव, दोनों में अंतर हैl प्यार और प्यास, दोनों आपस में क्या एक-दूसरे के पूरक हैं ! मैं कुछ समझा, और न समझा। मुझे कुछ ज्ञात ही, नहीं हो रहा हैll शायद आप ही, समझा सकें अब हमें। लेकर यही आस, आये हैं आपके पास। की रुबरू होकर, हमें … Read more

चली गिलहरी

डॉ.जियाउर रहमान जाफरी नालंदा (बिहार) *********************************************************************** चली गिलहरी कवि सम्मेलन में एक कविता पढ़ने, थी इच्छा सम्मान की इतनी लगी रातभर रटनेl आई जैसे ही माइक पर भूल गई वो रचना, उलट-पुलट वो पढ़कर आई सही-सही था पढ़नाl वहीं पे था एक बंदर बैठा बोला कवि जी सुनिए, आइंदा जब जाएं कहीं भी लिखकर उसको … Read more

सिसकता किसान

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** भंडार अन्नपूर्णा का बढ़ाएं, खेतों से काट फसलें जमा करता है खलिहान, कोटि-कोटि जनता का अन्नदाता है मगर अपने ही घर में, सिसकता किसान…,सिसकता किसानl दारिद्रय जिसकी व्यथा रही, क्या कहे वह अपनी अनकही कर्ज़ों के बोझ तले, हृदय में शूल गड़े संयम पे वश ना चले, राह कोई … Read more

मुझे तुम याद आते हो

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* यूँ ही बिन मौसम की बरसातें मेरी छत पर टप-टप करती बूंदें जहन में जाने कैसी हुलस-सी, जब भर जाती हैं मुझे तुम याद आते हो…। घड़ी-घड़ी तुम्हारी राह तकती बेसब्र आँखें,हर शय में जब तुम्हें ही तलाशती हैं, मुझे तुम याद आते हो…। भीगे से मन की देहरी पर डेरा … Read more