मैं गम लिखता हूँ

उज्जवल कुमार सिंह ‘उजाला’ नजफगढ़(नई दिल्ली) ****************************************************************** कलम की नोक से कागज की कोख पर, कहानियाँ जवानी की मजबूरियाँ दीवानी की, मन के गुबार को हरदम लिखता हूँ कागज को चिपकाकर छाती से,उस पर गम लिखता हूँl मगरूरियत जहां में है मजबूरियाँ कहाँ पर है, प्यार जब परवान चढ़े जुगनू आसमान चढ़े, उसको ये पता … Read more

इम्तहान

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* ये जीवन है इक इम्तहान, सबको देना पड़ता है। जो जीता जीवन सोच-समझ, वही सफलता पाता हैll जीवन के इस इम्तहान में, माहिर भी धोखा खा जाते। चक्रव्यूह में इस जीवन के, अच्छे-अच्छे फँस जातेll जीवन की कठिन परीक्षा में, नहीं हौंसला खोता है। जो जीवन में रखता हिम्मत, वही … Read more

अपनों से मिलन

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मिलवाना था अपनों से, तभी तो हमें-तुम्हें इस संसार में लाया है। किये होंगे पूर्व जन्म में कुछ अच्छे कर्म हमने, तभी तो आप जैसे, यार से मिलवाया है॥ अब तो दिल-दिमाग पर, बस तेरा ही नाम रहता है। सुबह तेरे से शुरू होकर, रात तेरे पर खत्म होती है। अब … Read more

हमारे त्यौहार

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** बहुत पुरानी रीत है,भारत के त्योहार। सभी मनाते प्यार से,खुशियों की बौछार॥ भाँति-भाँति के लोग हैं,उनके रीत-रिवाज। सभी धर्म समभाव से,करते हैं मिल काज॥ दीपों को दीपावली,रौशन करते लोग। भाईचारा मन बसे,गले मिले सन्जोग॥ होली जलती होलिका,दुष्कर्मों का नाश। प्रेम प्यार का पर्व यह,होता है आभास॥ रक्षा बन्धन … Read more

हम मन से खारे नहीं

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* यूँ तो सागर हैं हम पर मन से खारे नहीं, मौजों में ही जीते हैं हम किनारे नहीं… अपने दिल को जलाकर रोशनी देते हैं, तुम्हारे पथ में पड़े हैं पर अंगारे नहीं। क्यों सवाल करते कितना प्यार है तुमसे, कहना बनता नहीं बस इजहार है तुमसे… नाप-तौल कभी … Read more

भारतीय

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** युद्ध नहीं है धर्म हमारा, हम तो शांति पुजारी हैं। छेड़ा अगर किसी ने तो, नहीं छोड़ने वाले हैंll चिंगारी को छेड़ोगे तो, बन ज्वाला मिटा देंगे। यदि हम से टकराओगे तो, टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगेll अरे दुष्ट! तेरी यह हरकत, कभी सफल नहीं होगी। तेरी सारी गीदड़ चालें, डर-डर कर … Read more

झूठे सपने हैं सब

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** कहने को अपने हैं सब। मगर झूठे सपने हैं सब। मन मंदिर है मेरा अपना, विरोधी घंटे बजने हैं सब। पापों का हो रहा है नाश, एक-एक कर घटने हैं सब। शत्रु तैयार खड़े हैं सामने, शब्द बान से कटने हैं सब। संगठित हो मगर जानता हूँं, … Read more

नम्रता

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अहम भावना शून्यता, है नम्रता प्रतीक… कठिन काम भी नम्रता, कर देती है ठीक। निराभिमान और नम्रता, देती पोषक तत्व… कायरता है ये नहीं, ये प्रतीक पुरूषत्व। परदे में यदि नम्रता, के पीछे है स्वार्थ… वहां नम्रता कपट को, ही करती चरितार्थ। संयम व्रत साधन नियम, सतत प्रयत्न कलाप… किन्तु … Read more

नफरतों को हटा दीजिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** पेड़ हर मोड़ पर इक लगा दीजिए। कुछ धरा का प्रदूषण घटा दीजिये। और कुछ खूबसूरत बना दीजिए। नफरतों को वतन से हटा दीजिए। बस चुके हैं नगर नफरतों के बहुत, बस्तियाँ प्यार की अब बसा दीजिए। अन्नदाता हमारे हैं मुफलिस बहुत, अब किसानों को पूरा नफा … Read more

नियति से हारा नहीं हूँ…

अनुपम आलोक उन्नाव(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** जलधि-सा उन्मुक्त मैं ! पर- चित्त से खारा नहीं हूँl चातकों-सी साधना है- नियति से हारा नहीं हूँll पीर! पर्वत बन भले ही- व्योम से कर ले मिताईl वेदना उमडे़,घुमड़ कर- श्वाँस से कर ले सगाईl पर न मानूँगा,करुँगा, कर्म का मैं यज्ञ पल-पल, जिंदगी भी रुठ करके- चाहे कर ले … Read more