विद्या एक वरदान

मानसी श्रीवास्तव ‘शिवन्या’मुम्बई (महाराष्ट्र)****************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव…. माँ सरस्वती की महिमा से,हुआ विद्या का उद्गम। बिना भेदभाव किए नर-नारी में,विद्या का प्राप्त करने का अवसर। ज्ञान अर्जन करने वाला होता है ज्ञानी,मनुष्य में सर्वश्रेष्ठ होती है उसकी वाणी। जैसे वसंत पंचमी उत्सव है,माँ सरस्वती के आशीर्वाद का। यह एक संकेत … Read more

ऋतुराज तुम्हारा स्वागत

रश्मि लहरलखनऊ (उत्तर प्रदेश)************************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… देख रहे ऋतुराज कनखियोंस्वप्न-चिरैया कुछ चहकी है,गेंदा ऑंगन में बिखरा हैकुसुमित हो देहरी महकी है। महुवा की सुरभित चंचलतातन में भरती मिली उमंग,कुछ मलंग गीतों को साधेचले बजाते ढोल-मृदंग। चितवन हुआ लजीला जाताप्रियतम की बोली बहकी है,गेंदा ऑंगन में बिखरा हैकुसुमित हो देहरी … Read more

ज्ञान की गंगा

सुनीता रावत अजमेर(राजस्थान) ******************************************* आई बसंत पंचमी,वातावरण में छाई बहारहर दिशा में गूँज रहा,वीणा का मधुर संचार। पीले फूलों की चादर से, सजी धरा की रानी,सरसों के खेतों में देखो, प्रकृति है मुस्काईकोयल गाए अमृत वाणी, बगिया में आई बहार,शिशु के अधरों पर हँसी, करता माँ को प्रणाम बार-बार। विद्या की देवी, ज्ञान की गंगा,तेरी कृपा … Read more

वक़्त के सितम

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* दिन में तारे दिखा देते हैं,रात अंधेरी कर देते हैंवक्त के ये बदलते सितम,हाय, रोम-रोम कंपा देते हैं। महकती हुई बहारों में,खिलती हुई कलियों काये वक्त के बेरहम थपेड़े,मुख से घुँघटा उड़ा देते हैं। लिहाज़ से कोई सरोकार नहीं,नन्हीं ज़िंदगियों का भान नहींवक्र कर मुखमंडल की रेखा,जिंदगी को खेल बना देते … Read more

शारदे बरसो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… शुक्लपक्ष दिन पञ्चमी, वासंती मधुमास।सरस्वती पूजन सविधि, अरुणिम ज्ञान प्रभास॥ करो कृपा माँ शारदे, मिटा त्रिविध मन पाप।सदाचार जीवन चरित, हरो मोह मद ताप॥ हंसवाहिनी ज्ञानदा, श्वेताम्बुज शुभ वेद।वसन्त पंचमी साधना, करें असुर नर देव॥ बनो ज्ञान रक्षा कवच, समर कुमति … Read more

खो गया वसंत…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव…. हम आधुनिक हैं…न मन में उमंग,न तन में तरंगन जीवन में उछंग,कहीं खो गया है वसंत…। हम आधुनिक हैं…आधुनिकता की आपा-धापी मेंभौतिकता की आँधी में,कहीं खो गया है वसंत…। सरसों आज भी फूलती है,अमराई में आज भी बौर लगते हैंफागुनी बयार आज भी मादक … Read more

सरल सादगी जीवन सरिता ‘गीता’

तृप्ति तोमर `तृष्णा`भोपाल (मध्यप्रदेश) **************************************** इस धरा पर अवतरित हुई जीवन सार आदरणीय गीता,जीवन इनका सरल सादगी से परिपूर्ण जैसे बहती जीवन सरिता। जिंदगी के हर मुश्किल पड़ाव पर अडिग शिला,हरेक रंग रूप में सहज भाव, प्रेम इनसे हमको मिला। ममता, प्रेम से सराबोर माँ का साक्षात् दिव्य दर्शन,कुछ कही, कुछ अनकही, रूप-रंग से ओत-प्रोत समर्पण। … Read more

वासंती मधुमास

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** वसंत पंचमी विशेष… ‘सरस्वती’,वासंती मधुमासपूजन सविधि करें,अरुणिम ज्ञानकृपा। ‘सरस्वती’,माँ शारदेमिटा त्रिविध पाप,जीवन होसदाचार। ‘सरस्वती’,हरो मोहहंसवाहिनी ज्ञान दो,शुभ वेदसाधना। ‘सरस्वती’,साधना करेंबनो ज्ञान कवच,समर अज्ञानयश। ‘सरस्वती’,हो विजयसुपथ मान मिले,अन्धकार मिटेवीणावादिनी। ‘सरस्वती’,ज्ञान देनाकला चतुर्दश वाहिनी,नवरस आपसेहंसवाहिनी। ‘सरस्वती’,संगीत स्वर,गुण ध्वनि रीति,कर शुभब्रह्माणी। ‘सरस्वती’,बाधाएं मिटाओरचूँ सुयश परमार्थ,विद्या रत्नअक्षय। ‘सरस्वती’,आलोकित करोदो प्रकाश पुरुषार्थ,बढ़े ज्ञानसंस्कार। ‘सरस्वती’,मिटाओ पतझड़लोभ मोह छुड़ाओ।संस्कृति … Read more

जय माँ सरस्वती

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** जय -जय-जय माँ सरस्वती,हे सकल विश्व भव तारिणीतेरे शरण मैं आई माता,जय माँ कष्ठ निवारिणी। शुभ्रवस्त्रा धारिणी माता,जय माँ हंस सवारिनीजय-जय-जय पद्मासना देवी,हे माँ ज्ञान प्रकाशिनि। विद्या-बुद्धिदायिनी माता,जय माँ जग उध्दारिणीज्ञान का दीप जला दो माता,जय माँ वीणा वादिनी। कमल आसन शोभित माता,वीणा-पुस्तक धारिणीभक्तों का दुःख हरती माता,जय-जय-जय जगतारिणी। तीनों लोक … Read more

स्नान का खेला है जीवन

ऋचा गिरिदिल्ली******************************** जीवन स्नान का खेला है…?या कुम्भ के स्नान का मेला…? जीवन चक्र जब शुरू हुआ स्नान से,यही चक्र फिर ख़त्म हुआ स्नान पर। पहला पाप शुरू करने से पहले,आखिरी पाप करने के बादविडम्बना तो देखो,दोनों स्नान के लिए हम सक्षम नहीं। फिर, कुम्भ का स्नान,कार्तिक स्नानमहाकुंभ कामाघी पूर्णिमा, पौष पूर्णिमाऔर महाशिवरात्रि स्नान,के लिए … Read more