चिड़िया तू आँगन की

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* ‘राष्ट्रीय बेटी दिवस’ (२४ जनवरी)… बिटिया ही होगी लगता था,और खुशी से दिल चहकता थाजब तू कोख रही थी मेरी,संदल-संदल-सा महकता था। मुदित रही आने की आहट,तेरी भीतर में सरसराहटनन्हें हाथों को चूमा जब,मन पात-सा लरजता था। घर सुमन वाटिका अलबेली,पुष्प तरह खिली नयी-नवेलीममता की तैरती सिंधु में,ममत्व मेघ सरस बरसता था। … Read more

‘संदेह’ धीमा जहर

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** संदेह को संदेह,मत रहने देइसके निवारण काउपाय ढूंढ लें। जिसके प्रति संदेह,होता हैवह विश्वास योग्य,नहीं होता है। संदेह होने का जरूर,होता है कारणयह सच है या झूठ,कर लीजिए निवारण। संदेह से अच्छे-अच्छे,रिश्ते भी खत्म हो जाते हैंजिगरी दोस्त भी  दुश्मन बन जाते हैं। उन्होंने अपने प्यार के,पौधे में शक का … Read more

गणतंत्र पर्व मनाएँ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* खुशियों से भर जाएँ, आओ! गणतंत्र पर्व मनाएँ।नवल चेतना पाएँ, आओ! गणतंत्र पर्व मनाएँ॥ संविधान हमने पाया था, तम को दूर भगाया था,मुस्कानें अधरों पर आईं, हमको पर्व सुहाया था।विश्वगुरू हम, ज्ञानसूर्य हम, हमने कदम बढ़ाया था,सम्प्रभुता पाई थी हमने, जीवन-सुमन खिलाया था। तीन रंग रँग जाएँ,आओ! गणतंत्र पर्व मनाएँ,नवल चेतना … Read more

कैसा दौर आया…??

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* कैसा दौर आया…??आँख में न शर्म रही, बात ना मिठास भरी,दिल भरे कलुष से, लोग दो-गले हुएभावना अब सूख गई, चाल के प्रताप से,हम खड़े उदास हुए, आस ना बची हुईस्वर्ण युग बीत गया, आँख के करीब से,लोग भी नहीं बचे, सरल हृदय से सजे। अब नहीं उम्मीद रही, मन भरे … Read more

बीते हुए दिन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लाल क़िला दिल्ली के ऊपर,झंडा जो लहराता हैबीत चुके जो दिन भारत के,उसकी याद दिखाता है। त्याग दिया तन लड़ते-लड़ते,लक्ष्मी बाई मर्दानी नेऔर शिवा जी छत्रपति ने,भगत सिंह बलिदानी ने। याद करो राणा प्रताप,अपने प्रण पर जो अडे़ रहेबलिदानों को याद करो,अपनी हिम्मत से खडे़ रहे। वीर भगतसिंह की गाथा का,लोहा सभी … Read more

अपने-आपसे

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* अक्सर बातें करते हैं हम अपने- आपसे,अक्सर पूछा करते हैं हम अपने- आपसे। कभी-कभी मायूस सा रहता है मन फिर भी,खामोशी से बात किया करते हैं अपने-आपसे। न जाने क्या होगा, कैसे होगा, सोचा करते हैं,इन तन्हाइयों के साथ रहते हैं अपने-आपसे। डर सा रहता है कहीं बिगड़ न जाए कोई … Read more

भारत माँ पर न्यौछावर ‘नेताजी’

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* भारत माँ पर न्यौछावर हो, रच दी नई कहानी।थे सुभाष तो अति मतवाले, दे दी निज क़ुर्बानी॥ बंगाली योद्धा साहसमय, भारत माँ के लाल,अंग्रेज़ी अफसर भय खाते, हम सब हुए निहाल।आज़ादी-संघर्ष निराला, कांग्रेस की गरिमा,साहस, बल,अति शौर्य भरा था, अमर हो गई महिमा।गूँज रही है देशभक्ति की, गाथा मधुर सुहानी,थे सुभाष … Read more

पहला कदम ‘लक्ष्य’ संकल्प

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बढ़े राह पहला कदम, अटल लक्ष्य संकल्प।आलस की दुनिया तजो, पौरुष नहीं विकल्प॥ सोच समझ रखना कदम, राह बहुत संताप।मत फिसले दुर्गम शिखर, हो पछतावा आप॥ डिगे नहीं पहला कदम, सोच समझ आरोह।ओज धैर्य साहस सबल, टूट समझ अवरोह॥ कदम-कदम बढ़ते प्रथम, पौरुषेय सच चाह।शान्ति प्रेम समरस हृदय, मिले … Read more

दिल की दुनिया

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** दिल की दुनिया का राज खुलता कहाँ है,इस दुनिया में जो चाहे मिलता कहाँ है। यादों का सिलसिला समंदर-सा बढ़ा,हजारों गुलाबों में जो एक गुलाब खिला। कलियाँ फूलों की खिलती गुलशन में,साज बजते हैं मधुर धुन सरगम में। यादों की महफिल, यादों का पिटारा,खुलता नहीं कभी हजारों गुल में। यादें … Read more

आस्था का महाकुम्भ

धर्मेंद्र शर्मा उपाध्यायसिरमौर (हिमाचल प्रदेश)******************************************************* आर्यों की धरती पर लगा,सनातन का यह महाकुम्भ हैआगाज है श्रद्धा और प्रेम का,पिपासाओं को करता तृप्त है। साधु, संतों, सन्यासी, और,गृहस्थियों का है मनभावनदेता ज्ञान, वैराग्य उनको,कर देता भक्ति से पावन। मकरें दूर्क गुरु वृषभ जब,तीनों मिलते काली राततब जानो कि श्रद्धा का,लगने वाला है मेला आज। बारह कुम्भ … Read more