मजदूर
प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ मजदूरी का काम है,करते प्रतिदिन काम।बहे पसीना माथ से,मिले नहीं आराम॥मिले नहीं आराम,हाथ छाले पड़ जाते।सर्दी हो या ठंड,सभी श्रम करके खाते॥परिवारों को देख,रहे सबकी मजबूरी।कैसे हो हालात,करे फिर भी मजदूरी॥ कहते हैं मजदूर को,जग के वो भगवान।कर्म करें वो रात-दिन,बने नेक इंसान॥बने नेक इंसान,सभी के महल बनाते।करते श्रम … Read more