गौरी

सुदामा दुबे  सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* छन-छन छनकायेंं पायलियाँ पाँव में, गौरी आई गुलमोहर की छाँव में। लगे नैन उसके काजल से कजरारे, झूमे अल्हड़ कैश पवन के दाब में। सोहें तन उसके सिंदूरी से बाने, दमके अधर गुलाबी रवि के ताव में। यौवन मद में चूर रूपसी मतवारी, छेड़े मिलन का राग हिये के भाव में। … Read more

बेरोजगारी

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ***************************************************************************** रोजी-रोटी का संकट है, मेरी राह विकट है। पेट पीठ मिल एक हुए हैं, जठराग्नि उद्दीप्त है॥ कैसे जीवन आज निभाऊँ, यह परिवार बचाऊँ। सभी ओर से घबराया हूँ, जग आज अभिशप्त है॥ मेहनत-मजदूरी से मैं अब, दूर हुआ घर से अब। शहर-गाँव सब सून पड़े हैं, घर मेरा अतृप्त … Read more

प्रीत के पावन भाव प्रिये

सुदामा दुबे  सीहोर(मध्यप्रदेश) ******************************************* लिए हुए वो प्रीत के पावन भाव प्रिये, खड़ा अटल-सा पथ में अपने पाँव प्रिये। चटक सिंदूरी से तन पर उसके बाने, ठंडी शीतल-सी है उसकी छाँव प्रिये। नेह करें वो तुमसे बिल्कुल निर्मल-सा, लैश ना राखे वो कोई दुराव प्रिये। भूल जाएगा अपने सारे रंजो गम, भर जाएंगें उसके सारे … Read more

विश्वास मुश्किल है

कमल किशोर दुबे कमल  भोपाल (मध्यप्रदेश) **************************************************************************** आजकल इन्सान से कुछ आस मुश्किल है। आदमी पर हो गया विश्वास मुश्किल हैl राह काँटों से भरी है,दूर मंज़िल भी, डगमगा जाएँ कदम,आभास मुश्किल है। क्रोध मत करना कभी परिवार में अपने, फिर हृदय में पा सको आवास मुश्किल है। दोस्त करता हो प्रशंसा सामने तेरे, फर्क दुश्मन-दोस्त … Read more

अनुबंधों के सम्बन्धो में

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* अनुबंधों के सम्बन्धों में,जाने कहाँ सम्बंध खो गये, अपने,अपने नहीं रहे अब,जाने क्यों प्रतिबन्ध हो गये। सुख-दु:ख था जीवन में फिर भी,सुखमय सबको लगता था, आज अहं-विवाद ग्रस्त हो,परस्पर स्वतः कटु कन्द हो गये॥ प्रेम भाव था सम्बन्धों में,औपचारिकता ही अब पनप रही, मिलन की टीस सदा उठती थी,वो भाव … Read more

सावन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* उमड़-घुमड़ जब आता सावन। हृदयतल प्यास जगाता सावन। गरजते बादल,चमकती बिजली, पिया बिन नहीं,लुभाता सावन। नाचे मोर,अरु पपीहा बोले, राग मल्हार सुनाता सावन। लहर-लहर लहराये लहरिया, सावन याद दिलाता सावन। बरसे जब ये घनघोर घटाएं, विरह अगन भड़काता सावन। सखियां झूले पिया संग झूला, मनवा हूक उठाता सावन। अब की … Read more

पराक्रम

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** खड़े हैं सीमांत में,इस देश हित के कारने। शत्रुओं का दमन कर,आतंकियों को साधने। देश है मेरा खड़ा,हूँ दुश्मनों को मारने। गया हूँ इस समर में,या प्राण इस पर त्यागने॥ सौभाग्य मुझको धरा की,जो मातृभूमि है मेरी। दुश्मनों को मार कर,ही थमेगी गोली भरी। उठाएगा आँख जो,इस देश के भूभाग … Read more

एकांत भाता है मुझे

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** शांति का परिवेश यह एकांत भाता है मुझे, पर वो फुल साउंड में डीजे सुनाता है मुझेl शर्म से यह चेहरा पीला पड़ा है देख लो, परिजनों के सामने कितना नचाता है मुझेl नींद के मारे मैं दिन में गिर गया हूँ फर्श पर, शोर रातों का बहुत पागल … Read more

यूँ मने होली

डॉ.गोपाल कृष्‍ण भट्ट ‘आकुल’  महापुरा(राजस्‍थान) *************************************************************************************** (रचना शिल्प:मापनी-२१२२ २१२२ २१२२ २१२ ,पदांत-का डर न हो,समांत-अने) रंग होली में लगें यूँ भीगने का डर न होl भंग होली में पियें पर डूबने का डर न होl औपचारिकता लगे होली नहीं ऐसी मने, रंग में ना भंग हो संग छूटने का डर न होl चंग ढोलक ताल … Read more