बाल अधिकार जगाती ‘पोशम्पा’
डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************** पुस्तक समीक्षा… एक दौर था, जब गली-मुहल्ला ही नहीं, घर-आँगन भी बच्चों के खेलों और उनकी चिल्ल-पों से भरा रहता था। कहीं लट्टू, कंचे, तो कहीं चष्टांग-अष्टांग, गिल्ली-डंडा, स्टापू, रस्सी, चोर-पुलिस, मंत्री सिपाही और शतरंज आदि शारीरिक एवं मानसिक खेलों का जमावड़ा लगा रहता था। तब बाल जीवन में बोरियत … Read more