कर्म नीति हो
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** कर्म नीति होदेश-भक्ति न छोड़ेंधर्म प्रीति हो। वीर धरतीकरे भला सबकापेट भरती। घृणा छोड़ दोरिश्ते-नाते देखनास्नेह जोड़ लो। लालच त्यागेंअपना मानवता-अब तो जागें। भूल वासना,मोह-साधना जोड़-करो प्रार्थना। अंदर जीतें,नहीं सीमा उलांघेंसंबंध सींचें। मिटा असुरसंकल्प से मंजिलविजय सुर। जलाएँ ईर्ष्यानहीं सोचें बुराईजगाएँ आशा। ताकत रामजली रावण लंकाविन्रम काम। कुकर्म छोड़ोउतार मुखौटा तूधर्म से … Read more