अद्भुत रत्न
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** बहन बेटीइनको ही सम्भालेंअद्भुत रत्न। है ये आलोककरती फ़िक्र सदासम्भाले लोक। है अरूणिमाहर रूप में सेवाबेटी, कभी माँ। बेटी महानपाती जब शिखरबढ़ता मान। निभाती रीतिजोड़ती हर कड़ीबढ़ाती प्रीति। वीरांगना हैजब आती विपदाहोती गम्भीर। मूर्ति ममताहर गम सहतीरखे समता। देखती ख़्वाबफैलाए स्वयं पंखउड़े नभ में। देनी है शिक्षाबढ़ाए कुल मानयही हो रक्षा। समझो … Read more