तुम्हें लापता घोषित किया जाएगा

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** न जाने कब बारिश हो धरती जगह-जगह से दरक रही है, बूँद-बूँद पानी को तरसी जुबान कुलबुलाती आँतें, बारिश हो भी जाए तो क्या बह जाएंगे, थाली और लोटे भीगी,ठिठुरती देह पर कौन छाएगा छप्पर ? भूख के आगे, कौन रख देगा रोटी ? वे पहुंचेंगे जरूर तब … Read more

मेघ

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* सूर्य की तपन से तप रहा घर आँगन, झुलस रहा तन,मन हो रहा बैचेन; बीता अषाढ़ आने को है सावन, न जाने कौन से देश बदरा चले गए। देख रहा ऊपर अन्नदाता,अन्नदाता को, कब बरसोगे कब बोयेगें धान,सूख रहे खेत खलिहान; जो समय पर न बरसोगे,बर्बाद हो जाएगा … Read more

तुम मेरे कासिद हो,फ़रिश्ते हो

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* मैं तुम्हें इस तरह से प्रेम नहीं करती, जैसे मैं करती किसी हाड़-माँस के पुतले को। मैं तुम्हें इस तरह भी प्रेम नहीं करती, जिस तरह करती किसी देव को दिव्य गुणों से भरपूर। मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ ऐसे- जैसे किसी बादल को,पेड़ को,नदी को झरने को,पहाड़ को या फिर … Read more

बचपन

कैलाश मंडलोई ‘कदंब’ रायबिड़पुरा(मध्यप्रदेश) *********************************************************** मैं नन्हा-मुन्ना बच्चा था, बचपन कितना अच्छा था। लड़ूं झगड़ू मैं तो सबसे, था दिल में कोई बैर नहीं। नई-नई फरमाइश मेरी, घरवालों की खैर नहीं। समझ में थोड़ा कच्चा था, बचपन कितना अच्छा था॥ तेरे-मेरे ऊंच-नीच का, भेदभाव न था मन में। काम क्रोध मद लोभ का, विष भरा … Read more

तुम भी यह कर सकते हो

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** पहाड़ तोड़ रास्ता बना सकते हो, मरुस्थल में पेड़ उगा सकते हो… नामुकिन को मुमकिन बनाना, तुम भी यह कर सकते हो। धरती हिला सकते हो, आसमान झुका सकते हो… हौंसला अडिग रखना, तुम भी यह कर सकते हो। पढ़ाई कर सकते हो, लिखाई कर सकते हो… मन में … Read more

कहाँ हो तुम ? आ जाओ न

आशा जाकड़ ‘ मंजरी’ इन्दौर(मध्यप्रदेश) *********************************************************** बादल गरज रहे हैं बरस रहे हैं, पर मनवा मेरा सुलग रहा है,कहाँ हो तुम ? आ जाओ न। देखो साँझ हो गई है दीपक जल गये हैं, पर मन तो मेरा बुझा हुआ है,कहाँ हो तुम ? आ जाओ न। चाँद ऊपर हँस रहा है चाँदनी खिलखिला रही … Read more

कभी मेला करता रहा होगा गुफ्तगू…

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** रातों को सपनों में मेरे, गाँव कहीं इक आता है… जहाँ ‘कभी यादों का मेला रहा होगा।’ सूना-सूना-सा घट का पनघट, सूनी मन की चारदीवारी धड़कनों का जमघट लगता था, जिनसे ‘मैं गुफ्तगू करता था।’ हर रात चाँदनी की चादर ताने, तारों का मेला लगता था बदली झूला बनती थी, … Read more

विरह

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** आज दो अश्क नैनों से लिए जाते हो, तन्हा किसके भरोसे यूँ छोड़ आते हो। जब तक था साथ,लबों पर हँसी थी, आज सारी दुनिया में खो गई खुशी थी। क्यों हमें इस तरह गम दिए जाते हो, साँसों की डोर छोड़,कह देते हो। एक प्यार ही तो मांगा था मेरे … Read more

नयन से नीर

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* ख़ुशी-ख़ुशी जब गले मिले हम, तब भी बहते नयन से नीर। गम में भी तड़पें जो कभी हम, तब भी बहते नयन से नीर। ठंडी-ठंडी हवा चले जब, मन्द-मन्द मुस्काए। दिल में मचलती हैं उमंगें, नयन छलक ही जाएँ। हो मुहब्बत गर हमें उनसे, तड़पें दिन और रात। नयन … Read more

तालीम और सरकार

सोनू कुमार मिश्रा दरभंगा (बिहार) ************************************************************************* हसरतें तालीम की कभी आसान नहीं होती, तालीम बिन मनुज की कोई पहचान नहीं होती। तालीम बिन तकदीर की तस्वीर नहीं बदलती, तालीम हो तो मनुज की कभी पहचान नहीं मिटती। फिर क्यों तालीम को जालिम,जाहिल बनाने चले हैं… गरीबों से तालीम छीनने को फिर से वे अड़े हैं॥ … Read more