महिमा बरसात की
अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** अब तो हो जाने दो बरसात, तपन से धरा हो गई है त्रास। बुझ रही थी नहीं सभी की प्यास, बरसात होने से पूरी हुई आस। पानी के लिए मचा था हाहाकार, बरसात होने से आया करार। ह्रदय में धरती के पड़ रही थी दरार, बरसात के आने से आ … Read more