प्रेम का नाता जोड़

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. जब-जब युद्ध हुआ देशों में, तब-तब शरणार्थी संकट आया लोगों में। जीवन भी क्या चीज है, कहां से कहां पहुंच जाते हैं। एक बित्ता पेट के कारण, देश को भी छोड़ जाते हैं। सड़क मार्ग हो या समुद्री मार्ग, संकट से नहीं घबराते हैं। आंधी … Read more

वक्त

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** ऐ वक्त जब तक तू मेहरबान था, तब तक सारा ही जमाना मेरी मुट्ठी में बंद था। आज तू क्या रूठा, ये हसीन लगने वाला जहां रूठ गया देखते ही देखते, अपना ही कोई पराया हो गया। जख्म देने लगे वह,इतना सितम ढाया, बहारों के मौसम में पतझर छा गया। चाँदनी … Read more

कब तक…यूँ ही जीना होगा!

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. रब्बा तेरी दुनिया में, सब तेरी शरणायी हैं। तेरी छत्रछाया में फिर क्यों, हमने ही सजा पाई है। सब ही तो यहाँ शरणार्थी हैं, फिर हमको ही क्यों ? ये नाम मिला और क्यों, हम पर ये गाज गिराई। ना हमारा कोई ठौर-ठिकाना, ना जठराग्नि को … Read more

शरणार्थी

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. मैं शरणार्थी हूँ, तेरे दर पर आया हूँ थोड़ी सी जगह दे दो, यह विनती करता हूँ। मेरा घर-द्वार छूट गया, मैं हाथ जोड़ता हूँ मुझे अपना लो तुम, यह विनती करता हूँ। सब-कुछ मेरा छूट गया, नाते-रिश्ते रूठ गए मेरे पास कुछ नहीं बचा, मुझे अपना … Read more

चाँदनी

प्रेक्षा डॉन गोधा ‘परी’ दुर्ग (छत्तीसगढ़) ************************************************************* चमचमाती चाँदनी भी, आज क्यों उदास है। किस वहशी ने तोड़ी कली, बुझाई अपनी प्यास है। चाँदनी आज अपनी, मजबूरियों पर रोई हैl कैसे समझाऊं उसे जिसने, अपनी संतान खोई है। क्या लिखे परी, उस चाँदनी के हालातl जो कई गुनाहों की गवाह है, न दे सकती बयानातll … Read more

मानवतावाद सत रहने का

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. बड़ा ही दु:खद होए पल, दु:ख-दर्द असमर्थता का जब ना हो कोई राह, जीवन रक्षा करने कीl अकाल भूख व युद्धजनक, बीमार तन-मन सहने का दयनीय स्थिति तड़पन भी, कातर आँखें,माँग शरण कीl देश हमारा है बड़ा अनोखा, संस्कृति उत्तम सदियों से बाँहें पसार … Read more

विचारणीय दिवस

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. जरूरत आन पड़ी ऐसी भी, दिवस अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी मनाया जाए… वैश्विक स्तर पर,उपाय सुझाया जाए। यू.यन.एच.सी. रिपोर्ट कहती, प्रभावित विकासशील देश हैं होते… रोहिंग्या मुस्लिम देखो अपनी पहचान को हैं रोते। सीरिया में छिड़ी जो जंग, बेघर हुए हजार,तिब्बत के शरणार्थी की भी सुन लो … Read more

भारत मानवता का धर्म निभाता

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. जो भी इस धरती पर आया, इस धरती ने उसको अपनाया शरण देती है ये धरती, ये धरती तो पावन है। जो खुद के देश में सुरक्षित नहीं, वो होते अल्पसंख्यक उन पर रोज-रोज अत्याचार होता, वो अपना देश छोड़कर भारत की शरण में आए। ये भारत … Read more

मानवता रखो

अलका जैन इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. गृह युद्ध ने कर दिया परेशान दोस्तों, बैचेनी बढ़ती जा रही चारों ओर दोस्तों। हर पल मौत का खतरा मंडराता रहे, औलाद का भविष्य चूर-चूर कर रहे। राजनीति की बिगड़ी ऐसी चाल ये, खून-खराबा,हिंसा का बोलबाला ये। दाने-दाने को अपने देश में मोहताज, अपने ही देश में … Read more

गलत सोच

सुमिधा सिदार`हेम` सरकण्डा(छत्तीसगढ़) ****************************************************** थक गई हूँ तेरे गलत इल्ज़ाम से, कठपुतली की तरह कब तक सजी रहूँ महंगी साड़ी,गहने-श्रृगांर से। मैं कोई वस्तु नहीं,मेरे अन्दर भी जीव है, दर्द होता है तेरी इन कड़वी बातों से। मैं औरत हूँ, बस औरतों के बीच रहूँ यही मेरी पहचान है। जीना चाहती हूँ मैं, कुछ करना … Read more