भारत देश महान है

प्रियांशु तिवारी ‘वात्सल्य’ लखनऊ( उत्तरप्रदेश) **************************************************************************** लोकतंत्र की परिभाषा का अच्छा-खासा नाम है, जनतंत्र की हर भाषा का भारत में सम्मान है दुनिया कहती है ऐसा भारत देश महान है…। सारी दुनिया मान चुकी संस्कृति की यह खान है, जन्म लिए जहाँ नटखट कृष्णा,पूजनीय जहाँ राम है… शील,स्नेह,सत्य,प्रेम का प्रसारित जहाँ से ज्ञान है, दुनिया … Read more

मत थका जिंदगी

राम भगत किन्नौर ******************************************************************* मत थका जिंदगी इतना, मत तड़पा जिंदगी इतनाl हर मंजिल मिली,हर ख्वाहिश मिली, अपने भी मिले,पराये भी मिलेl कोई ना अपना यहां बन पाया, सबने स्वार्थ के लिए रिश्ता है यहां बनायाl दोस्त का प्यार मिला, इकरार,तकरार सब मिलाl सबने रिश्ता तो जोड़ा, स्वार्थ का रिश्ता जोड़ाl थक गया हूँ भगत … Read more

कविता क्या है

देवेन्द्र कुमार राय भोजपुर (बिहार)  ************************************************************* नैतिकता की भटकी राह को सच्चा मार्ग दिखाती कविता, दर्द अश्क की गर्मी को हरपल शीतलता देती है कविताl इंसानों के आत्मज्ञान का दर्पण सही दिखाती कविता, क्यों न कहूँ कि कविता देखो जीवन की प्रतिछाया कविता। वर्तमान के व्यवहारों की परिभाषा होती है कविता, कहे राय हर युग … Read more

हिंसा का हो खातमा

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** घायल हुआ है मानव,खतरे में पड़ी मानवता, नफरत का बीज बो कर मन में है उपजाया मोह से सींचा उसने,आंतक बन उग आयाl कागज के चन्द टुकड़ों में बिक गई मानवता, लाचार हुई है अहिंसा,हिंसक बन कर खायाll मासूमयित रो पड़ी,कंगन ने शोर मचाया, लाली कहे पुकार,सूनी ना करो मेरी मांग … Read more

…ताकि उसके बच्चों के सपने रंगीन हों

रितिका सेंगर  इंदौर (मध्यप्रदेश) ****************************************************** मिट के खुश होना पंख बहुत मजबूत थे उसके… उड़ान भरना जानती थी वो फिर भी, खुद को कर लिया कैद पिंजरे में… ताकि,उसके बच्चों को मिल सके आशियाना…l शब्द बहुत थे पास उसके, बोलना आता था उसको पर रही खामोश… ताकि,उसके बच्चों को रिश्ते मिल सकेंl हौंसला बुलंद था, … Read more

सास-बहू का रिश्ता

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ सास,बहू का रिश्ता क्या होता है, मैं तुमको समझाता हूँ। हर घर की कहानी,तुमको मैं सुनाता हूँ, सुनकर कुछ सोचना,और कुछ समझना। सही बात यदि मैंने कही,तो बता देना मुझे॥ सास-बहू का रिश्ता बड़ा अजीब होता है, बहू,सास को माँ कहे तो रिश्ता प्यारा होता है। सास अगर बहू को बेटी … Read more

तपती धरती

डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** तपती धरती,जल रहा आसमान, घटता जल,सब हैं हैरान। लुप्त होती हरियाली, नहीं दिखती प्रकृति की लाली। नीम-पीपल की छाँव तले, अब न कोई झूला झूले। बाग-बगीचे में न कोई मिले, पेड़-पौधों को सब भूले। शीतल न होती अब सिंदूरी साँझ, धरती हो रही अब बाँझ। सूरज अब डराने लगा है, मन … Read more

खिड़की खुली रहीं

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** खिड़की और दरवाजे, झाड़ते-पोंछते पता ही नहीं लगा, कि कब खुल गयीं खिड़कियाँ कब खुल गए दरवाजे, मेरे लिए। जंगलों की तरफ, रात-रात भागती कुम्हारिन कभी पिशाचिन बनती तो कभी बच्चों को, उठा ले जाने वाली डायन अंधेरे में टार्च और लाठी, नंगी आँखें सिर्फ एक औरत की … Read more

दर्पण की व्यथा

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** जो जैसा मेरे दर आता, ठीक हूबहू खुद को पाता। फिर मुझ पर आरोप लगाता, पक्षपात कह गाल बजाता॥ मैं हँसता वह जल-भुन जाता, ज्यों दाई से गर्भ छुपाता। अदल-बदल मुखड़े लगवाता, रंग-रसायन नित पुतवाता॥ शिशु-सा नंगा रूप दिखाता, इठलाता एवं शर्माता। झूठ बोलने को उकसाता, सच्चाई से नज़र चुराता॥ … Read more

मेरा हमसफ़र

कपिल कुमार जैन  भीलवाड़ा(राजस्थान) ***************************************************************** बारिश में न रात जल्दी आ जाया करती है, आफिस से घर लौटते वक़्त अँधेरा हो जाता है। सड़क पर चारों तरफ भीड़… ट्रैफिक का शोर…, तकरीबन पन्द्रह मिनट लगते हैं रास्ता तय करने में… कोई है ! जो मेरा हमसफ़र बनता है इस बीच। कल देखा था आसमां पर, … Read more