जन्मकुंडली…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ लोग कहते हैं जोड़ियाँ ईश्वर बनाता है, शास्त्रों में लिखा है हमारी जन्मकुंडली ऊपरवाला बनाता हैl फिर क्यों ? रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं, क्यों दिल टूटते हैं ? क्यों अपने ही अपनों से रूठते हैंl क्यों रिश्ते, दाग़दार होते हैं ? क्यों रोज़, यहाँ भावनाओं का व्यापार … Read more

समर्थन

राजकुमार जैन राजन आकोला (राजस्थान) ****************************************************** यह जो मील के पत्थर महज पाषाण नहीं है, गति है,लय है हमारे चलने के साथ जीवन के साक्षी भी बनते हैंl जीवन में कुछ पल अपने अस्तित्व बोध में ऐसे भी होते हैं, जिनमें हम बुद्ध बन जाने को विवश होते हैंl खामोशियों में ही मन के सूने … Read more

परिचय

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* किसका परिचय ? कैसा परिचय ? चन्द शब्दों की परिधि में, नहीं बांध सकोगे तुम मुझको। क्या जानते हो तुम मेरे बारे में ? और, क्या जानना चाहते हो ? न पहचान सकोगे तुम मुझको, मैं जो हूँ वो मैं कतई नहीं, और जो मैं हूँ उसे तुम जानते नहीं॥ … Read more

श्रेय उनको,जिन्होंने दिया ज्ञान

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ ५ सितम्बर शिक्षक दिवस विशेष………. आज जो कुछ भी हूँ मैं, इसका श्रेय उन शिक्षकों को जिन्होंने १ से लेकर एमबीए तक पढ़ाया, और यहां तक पहुंचाया। कभी भूल सकता नहीं,उनके योगदान को, इसलिए,सदा में उनकी चरण वंदना करता हूँ॥ माता-पिता ने पैदा किया, पर दिया गुरु ने ज्ञान। तब जाकर … Read more

बादल बरसे

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** बूंदों की रिमझिम के समय, ये बादल बरसे,बादल बरसे। आती थी बस काली घटाएं, कई दिनों तक खूब यह तरसे, मोरों ने जब नाच दिखाया इंद्र देव का मन भर माया, तब जाकर के बादल बरसे। सूर्य देव ने कृपा दिखाई, सागर जी से टेर लगाईl उड़ी लहर जब … Read more

वह प्यारा-सा गाँव

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** मन क्यों उबने लगा दूषित वातावरण हुआ, दिल चाहे कुछ और चलो चलें अबअपने गाँव, कि ओर… चलो चलें अब…। पगडंडी के रास्ते पतली संकरी वो गलियाँ, खेतों में झूमें बालियाँ आमों के लटकते बौर… चलो चलें अब अपने…। बहती हवा सुहानी है खेतों में बहता पानी है, जोड़ी बैलों की … Read more

पावस

दुर्गेश राव ‘विहंगम’  इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** तरु की डालियाँ झूम उठी, मचल रहे हैं पल्लव सर-सर चलती समीरl मन में उठे उमंग, चलो झूम उठें वर्षा के संगl हर बूंद में हीरे-सा नीर, दादुर बोले टर-टर चम-चम चमके दामिनीl काला मेघ आया चारों ओर वसुधा पर छाया, कल-कल बहती नदिया, खेले संग नीर के मछलियाँl भास्कर … Read more

बरसात

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* बरसात प्रकृति का हसीन एहसास, जैसे दुनिया के खुशी के पल हों पास। पायल की झनकार-सा रोचक-सा संगीत, जैसे इस सुहाने मौसम में मिला हो मनमीत। रंग-बिरंगी फिजाओं से घिरा हो चमन, अपनी अठखेलियों से मनमुग्ध है गगन। रिमझिम बूदों से धरती ने दुल्हन-सा रूप सजाया, जैसे हर ओर खुशियों … Read more

मशहूर हूँ खुद की लाचारी से..

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* मैं कृषि हूँ,कृषि प्रधान देश का देश की रीढ़ की हड्डी हूँ, देश की रक्त धाराओं में बहता हुआ प्रसिद्ध हूँ। देखो ना… मशहूर हूँ मैं दुनिया में खुद की लाचारी से, भुखमरी,अकाल,अशिक्षा की बीमारी से। माना तृप्त करता हूँ मैं सबको, फिर क्यूँ खुद ही भूखा रह जाता हूँ… … Read more

बिछड़े हुए लोगों से

आर.पी. तिवारी स्वदेश बांदा (उत्तर प्रदेश) ********************************************************************** बिछड़े हुए लोगों से, गुरेजा न हुआ कर। बीते हुए लम्हों को, कुछ याद किया करll जो भूल गए तुझको, आगाजे-सफर में। भूल से ही उनसे, मिलने की दुआ करll बिछड़े हुए लोगों से, गुरेजा न हुआ कर… ऐ दोस्त तुझे दुश्मन, की पहचान कहां है। महफिले-यारा में, … Read more