केदार गौरी मंदिर

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** भुवनेश्वर यात्रा ……. भुवनेश्वर के मंदिर अपनी स्थापत्य कला और वास्तु वैभव के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। इस पुण्यभूमि पर स्थित लिंगराज मंदिर,परशुरामेश्वर मंदिर और मुक्तेश्वर मंदिर के दर्शन के बाद हमें केदार गौरी मंदिर के दर्शन का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। भुवनेश्वर के ८ अष्टशंभू मंदिरों … Read more

जिंदगी में ‘मौत के मुकुट’ की नई दस्तक ‘कोरोना’

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** विडंबना ही है कि दुनिया जितनी करीब आती जा रही है,नई-नई और पहले से ज्यादा खतरनाक बीमारियों के लिए भी गुंजाइश भी बढ़ती जा रही है। मनुष्य और जानवरों के बीच बीमारियों के डरावने पुल बनते जा रहे हैं। बीसवीं सदी ने जाते-जाते हमें एचआईवी (एड्स) जैसी वायरल बीमारी दी तो … Read more

राजाओं के राजा धराधीश राजा भोज

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** ३० जनवरी ‘बसंत पंचमी’-राजा भोज जयंती विशेष………………. परमवीर राजा भोज का स्मरण होते ही सत्य,साहस,ज्ञान,कौशल और जलाभिषेक का बोध होने लगता है। सम्यक् कालजयी बनकर भूतो न भविष्यति,राजा भोज यथा दूजा राजा की मीमांसा में राजा-महाराजाओं के देश में राजा भोज राजाओं के राजा कहलाए। इनके राज में प्रजा को सच्चा … Read more

गांधीवाद-जो सिखाता है जीने की कला

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** शहीद दिवस(३० जनवरी) विशेष…………….. `गांधीवाद` महात्मा गांधी के आदर्शों,विश्वासों एवं दर्शन से उदभूत विचारों के संग्रह को कहा जाता है,जो स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े राजनीतिक एवं आध्यात्मिक नेताओं में से थे। यह ऐसे उन सभी विचारों का एक समेकित रूप है,जो गांधीजी ने जीवन पर्यंत जिया था। `सत्य` … Read more

अधिकारी `स्वामी` ना होकर मात्र `सेवक`

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* गणतंत्र दिवस हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्यौहार है,जिसके लिए हमारे वीर क्रांतिकारी बलिदानियों ने सर्वस्व त्याग कर दिया था और अपने प्रधान,अपने निशान एवं अपने संविधान हेतु प्राणों की आहूतियां दी थीं। फलस्वरूप भारतीय नागरिकों को स्वामी के रूप में मतदान का अधिकार मिला,जिसके प्रयोग से हमारे … Read more

गणतंत्र के सात दशक

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** `परिवर्तन का जोश भरा था,कुर्बानी के तेवर में। सब कुछ हमने लुटा दिया था,आजादी के जेवर मेंll` हम खुशनसीब हैं कि इस वर्ष २६ जनवरी को ७१वाँ गणतन्त्र दिवस मना रहे हैं। १५ अगस्त सन् १९४७ को पायी हुई आजादी कानूनी रूप से इसी दिन पूर्णता को प्राप्त हुई थी। … Read more

हिन्दी के ऑयरिश योद्धा:डॉ. सर जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन

डॉ. अमरनाथ शर्मा  ****************************************************** विशेष श्रंखला:भारत भाषा सेनानी…….. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन(७-१-१८५१)आयरलैंड के निवासी थे और भारतीय सिविल सर्विस के अधिकारी के रूप में भारत आएl विभिन्न पदों पर लगभग २६ वर्ष भारत में रहे,किन्तु उनकी ख्याति वास्तव में उनके द्वारा किए गए ११ खंडों में प्रकाशित महान ऐतिहासिक कार्य ‘भारत का भाषा सर्वेक्षण’ के कारण … Read more

गणतंत्र-गर्वतंत्र होकर चिंतातंत्र

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** अपने ७१ वें वर्ष में भारत का गणतंत्र खुद पर गर्व करे या चिंता करे ? सोचता हूँ कि वह दोनों करे। गर्व इसलिए करे कि अगर हम एशिया और अफ्रीका के देशों पर नज़र डालें तो हमें मालूम पड़ेगा कि उन सबमें भारत बेजोड़ है। इन लगभग सभी देशों … Read more

भारतीय गणतंत्र में जनता की भागीदारी

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष……… भारतीय संघ की विविधता में एकता सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक `गणतंत्र दिवस` का महत्वपूर्ण पर्व दस्तक दे चुका हैl दिल्ली के राजपथ पर झांकियों के रूप में हम सब भारत के आगत-अनागत को देखते हैंl दुनिया दांतों तले उंगली दबा लेती है,दुश्मन सहम जाते हैंl हर … Read more

गणतंत्र का बदलता स्वरूप

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** अब हमें ७१वें गणतंत्र दिवस पर इस बात का गहनता से विचार करना है कि आज तक कितना स्वरूप बदला,बदला भी है,तो दिशा सकारात्मक है क्या ? इतनी अधिक जनसंख्या औऱ विविधता से भरे राष्ट्र में सबको साथ ले कर चलना,सबको बराबर मान-सम्मान देना,किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे,इसका … Read more