बाल साहित्य लेखन एवं चुनौतियाँ

राजकुमार जैन ‘राजन’ आकोला (राजस्थान) ****************************************************** बालक किसी भी देश,समाज,संस्कृति का ही नहीं अपितु सम्पूर्ण मानव जाति की पूंजी होता है। बच्चों में हमारा भविष्य दिखाई देता है। वे कल की उम्मीद बंधाते हैं। बालक ईश्वर की बनाई वह अनुपम कृति है,जिससे कायम है जीवन धारा,संस्कृति और शाश्वत मूल्य। बालक जितने सुकोमल होते हैं,उतने ही जिज्ञासु … Read more

और कितनी निर्भयाएं कब तक नोंची जाएंगी ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* हैदराबाद घटना-विशेष रचना………… समूचा राष्ट्र रांची और हैदराबाद में हुए दो जघन्य,वीभत्स एवं दरिन्दगीपूर्ण सामूहिक बलात्कार कांड से न केवल अशांत है बल्कि कलंकित भी हुआ है। एक बार फिर नारी अस्मिता एवं अस्तित्व को नोंचने वाली इन घटनाओं ने हमें शर्मसार किया है। ये त्रासद घटनाएं बता रही हैं कि … Read more

शांति निकेतन

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** भाग-८………. `शांति निकेतन` यात्रा और कंकालितला मंदिर के दर्शन के बाद अगला लक्ष्य भुवनेश्वर का था,जहां के कई प्रमुख स्थल हमारी जिज्ञासा के केन्द्र में थे…l सुबह ८:३० बजे हम ‘इंटरसिटी एक्सप्रेस’ से गुस्करा से हावड़ा के लिए रवाना हुए…बर्दवान स्टेशन होते हुए यह ट्रेन १२ बजे हावड़ा पहुंची। … Read more

`नारी` कोई खिलौना नहीं,गुनाहगारों को कड़ी सजा जरूरी

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* हैदराबाद घटना-विशेष रचना………. आज हमारे देश मेंं बढ़ रहे अपराध और अपराधियों के लिये सरकार द्वारा सख्त कानून व्यवस्था नहीं है। इतने संगीन अपराध होने के बाद भी देश की सरकार व राजनेता इतनी शांति से कैसे बैठ सकते हैं। शायद ऐसा उनके किसी अपने के साथ नहीं होता इसलिए। … Read more

देश में फाँसी की बढ़ती मांग और जल्लादों का टोटा…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** यह भी विडंबना है कि जहां एक तरफ हैदराबाद सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी नराधमों को फाँसी की सजा देने की मांग देश भर में उठ रही(थी),वहीं कानून जिन्हें मौत की सजा दे चुका है,उन्हें फाँसी के फंदे पर लटकाने के लिए जल्लाद नहीं मिल रहे। ७ साल पहले हुए `निर्भया` कांड … Read more

महिला सशक्तिकरण और जागरूकता की आवश्यकता

इलाश्री जायसवाल नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* महिला सशक्तिकरण आजकल एक ज्वलंत मुद्दा है,ज्वलंत प्रश्न है। `बेटी बचाओ,बेटी बढ़ाओ’,’महिला आरक्षण’ जैसी अनेक बातें हमें लगभग प्रतिदिन ही सुनने को या देखने को मिल जाती हैं। इनका प्रचार करने वाले भी पुरुष ही ज़्यादा होते हैं। हालांकि,स्त्रियां भी इसमें बढ़-चढ़ के हिस्सा ले रहीं हैं,तब भी बात इतनी बन … Read more

सामूहिक दुष्कर्म: कड़े से कड़े दण्ड की जरूरत

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* हैदराबाद घटना-विशेष रचना……………… द्वापर युग के द्रौपदी चीरहरण से लेकर `दामिनी` सामूहिक बलात्कार एवं `निर्भया` कांड से लेकर हैदराबाद की पशु चिकित्सक ‘दिशा’ बेटी की सामूहिक बलात्कार और निर्मम हत्या पर विचार किया जाए,तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि न्यायिक व्यवस्था एवं सामाजिक तंत्र में … Read more

माता सदैव भार्या नास्ति

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** हैदराबाद घटना-विशेष रचना…………….. माता सदैव-भार्या नास्ति अर्थात हे देवी! तुम माँ हो सकती हो किन्तु पत्नी कभी नहीं। स्वर्गलोक में अपने धर्मपिता इन्द्र के पास ब्रह्मास्त्र की विद्या लेने गए अर्जुन पर मोहित उर्वशी को माता सम्बोधित करने पर क्रोधित अप्सरा ने उसे क्लीवता का श्राप दिया,परन्तु धन्य था कौन्तय जिसने … Read more

धो डालो जन्मे कलंक को

वन्दना शर्मा’वृन्दा’ अजमेर (राजस्थान) *********************************************************************** हैदराबाद घटना-विशेष रचना………….. आह,छि!धिक्कार है ऐसी मर्दानगी पर,क्या अब इस आर्य भूमि पर जवानी माँस के लोथड़ों को नोंचने के लिए आती है ? कब तक! आखिर कब तक ये प्रियंकाएँ हवस का शिकार होती रहेंगी,और तुम अंधी,बहरी,गूंगी सत्ता और कानून से न्याय माँग रहे हो! तुम उन नपुंसकों से … Read more

क्षमा प्रियंका…

कुँवर बेचैन सदाबहार प्रतापगढ़ (राजस्थान) ********************************************************************** हैदराबाद घटना-विशेष रचना………. छोटे-छोटे हाथ,छोटे-छोटे पैर परियों जैसी सुंदर अबोध-सी बिटिया जब पैदा होती है,तो अपने साथ पूरे परिवार का सौभाग्य लेकर आती है…। पिता की इच्छा शक्ति,माँ की ताकत,दादी-दादा में बचा हुआ बचपन चाची-चाचा,ताऊ-ताई का खिलौना,बुआओं की सहेली,बड़े भाइयों की जिम्मेदारी सब कुछ लेकर आती है…। अक्सर कहता … Read more