`प्रेम दिवस`:संबंधों में प्रेम की मिठास घोलिए

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* ”आंधी से भी भयानक होती है रक्त की वह हलचल,जिसे मनुष्य ने `प्रेम` की संज्ञा दी है।“ रांगेय राघव की यह प्रेम एवं प्रणय से जुड़ी अभिव्यक्ति आज के युवा प्रेमियों पर सही साबित होती हैl युवा दिलों पर उमड़ती इसी आंधी को अभिव्यक्त होने का अवसर मिलता है,`वैलेंटाइन-डे` यानी प्रेम … Read more

दलों की सत्ता लोलुपता और नैतिकता को तिलांजलि

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** नैतिकता तो पहले ही राजनीति में गायब होती जा रही थी,अब सत्तालोलुपता में दिल्ली विधानसभा के चुनाव में प्रचार में मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी गईं। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का चुनावी सभा में तेज़ आवाज़ में ललकारना-‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ कितना गलत था। … Read more

जातिवाद का खात्मा कैसे हो ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ढाई लाख रु. का अनुदान देती है,याने यह पैसा उनको मिलता है,जो अनुसूचित जाति या वर्ग के वर या वधू से शादी करते हैं,लेकिन खुद होेते हैं सामान्य वर्ग के! सामान्य का अर्थ यहां ऊंची जाति ही है। याने ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य! … Read more

पर्यटकों को बरबस खींचता इस्कॉन मंदिर

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** भुवनेश्वर यात्रा……….. ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर राज्य का सबसे बड़ा शहर है,जिसे भारत के पूर्वी हिस्से का सांस्कृतिक केन्द्र माना जाता है। ऐतिहासिक मंदिर और अपनी गौरवशाली विरासत के कारण इस शहर को `टेम्पल सिटी` के रूप में भी जाना जाता है। यह शहर हिंदू,जैन और बौद्ध संस्कृति में … Read more

बंदूक और रेस्त्रां कारोबार:सरकारी मशीनरी की मानसिकता बदलनी चाहिए

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** अपनी समृद्ध पाक कला और खवैयों के देश भारत में रेस्टारेंट या होटल खोलना,बंदूक खरीदने से कहीं ज्यादा कठिन है। मतलब ये कि,आप आत्मरक्षा के लिए बंदूक का लायसेंस अपेक्षाकृत आसानी से बनवा सकते हैं, लेकिन पेट-पूजा के लिए रेस्त्रां खोलना टेढ़ी खीर है,क्योंकि एक अदद रेस्टारेंट या होटल खोलने(सड़क किनारे … Read more

`प्रदूषण` गायब रहा चुनाव से

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* राजधानी दिल्ली में अक्सर वायु एवं जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या के रूप में खड़ा रहता है,लेकिन इस गंभीर समस्या का दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा न बनना विडम्बनापूर्ण है। असल में देखें तो संकट वायु प्रदूषण का हो या फिर स्वच्छ जल का,इनके मूल में विकास की अवधारणा के … Read more

गिद्दे-भंगड़े पर तालिबानी मानसिकता

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** ‘मेहन्दी.. मेहन्दी.. मेहन्दी.. नच्चां मैं अम्बाले मेरी धमक जलन्धर पैन्दी`, पंचनद क्षेत्र के लोकनृत्य गिद्दे-भंगड़े की लोकप्रियता वर्तमान में इस कदर आसमान छू रही है कि,इनके बिना आज पंजाब तो क्या भारतभर में शायद ही शादी-विवाह सम्पन्न होते होंगे,लेकिन गिद्दे-भंगड़े की जन्मभूमि में ही इसपर तालिबानी त्यौरियां चढ़ी दिख रही हैं,जिसकी … Read more

सरकार थोड़ी हिम्मत और करे

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** भारत में जनता के क्रोध का जो बरगद उग आया है,सरकार ने उसकी डालें और पत्ते तो तोड़ दिए हैं लेकिन उसकी जहरीली जड़ ज्यों की त्यों है। गृह राज्य मंत्री ने संसद में साफ़-साफ़ कह दिया है कि इस समय देश में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर जैसी कोई चीज बनने … Read more

अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार मत ठहराइए

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** हमसे जीवन में कई बार छोटी-बड़ी गलतियां होती हैं। गलतियों से हम बहुत कुछ सीखते हैं,लेकिन एक चीज जो हमें सीखनी चाहिए वो हम नहीं कर पातेl वो है अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ना ठहराना। अपनी गलती का जिम्मा खुद लें। अक्सर आपने देखा होगा कि हमसे अगर … Read more

वाह! क्या उम्मीदवार हैं हमारे ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** दिल्ली के आम चुनाव की चर्चा देशभर में है। कई कारणों से है लेकिन कुछ कारण ऐसे भी हैं,जिनकी वजह से दिल्लीवाले अपना माथा ऊंचा नहीं कर सकते। दिल्ली में शिक्षा-संस्थाओं की भरमार है लेकिन दिल्ली प्रदेश के चुनाव में ५१ प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं,जो १२ वीं कक्षा या उससे … Read more